BNS 47, IPC 108A - विदेश में हुए अपराध के लिए क्या भारत में नागरिक को दंडित किया जा सकता है

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Legal general knowledge and law study notes 

प्रत्येक राष्ट्र का यह कर्तव्य है कि वह पड़ोसी देश की शांति व्यवस्था को भंग करने वाले कार्यो की रोकथाम करे। अगर वह ऐसा नहीं करते है तो यह अंतरराष्ट्रीय विधि एवं अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करते है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रवर समिति के अनुभव द्वारा भारतीय दण्ड संहिता, 1860 में एक नई धारा जोड़ी गई 108 के (A) जो वर्तमान कानून में भी प्रतिस्थापित की गई जानिए।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 47, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 108A की परिभाषा 

जो कोई व्यक्ति भारत में रहकर किसी व्यक्ति को भारत के बाहर अपराध करने के लिए उकसाता है वह व्यक्ति IPC की धारा 108A एवं BNS की धारा 47 के अंतर्गत दोषी होगा।

उदाहरण अनुसार-:
कोई K नामक व्यक्ति जो भारत मे रहता है, H विदेशी व्यक्ति को नेपाल में हत्या करने के लिए उकसाता है यहा क दुष्प्रेरण के अपराध का दोषी होगा।
इससे संबंधित महत्वपूर्ण जजमेंट जिसने इस कानून को ठोस बनाने में मदद की जानिए ।
1. गणपत राव बनाम रामचंद्र वाद।
2. बलवंत सिंह बनाम सम्राट वाद।  
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:- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद), इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com
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