BNS 45, IPC 107 - लोगों को अपराध के लिए भड़काने वाले व्यक्ति को दंडित करने का प्रावधान

Legal general knowledge and law study notes 

एक व्यक्ति स्वयं कोई अपराध नहीं करता है लेकिन किसी अन्य व्यक्ति को अपराध करने के लिए उकसा देता है, वह व्यक्ति दुष्प्रेरण के अपराध का दोषी होता है। यहां हम आपको बता दें कि, दुष्प्रेरण का अर्थ होता है उकसाना या किसी व्यक्ति की दोषपूर्ण कार्य में सहायता करना या उसे प्रेरित करना।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 45, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 107 की परिभाषा 

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 107 में दुष्प्रेरण के अपराध को एक दण्डनीय अपराध माना गया है अर्थात्‌ व्यक्ति स्वयं किसी अपराध में भाग न लेकर किसी अन्य व्यक्ति को उकसाता है अपराध करने के लिए वह दुष्प्रेरण के अपराध का दोषी होगा।

कानून में दुष्प्रेरण के अपराध के तीन प्रमुख तत्व बताए गए हैं:-
1. उकसाने के द्वारा अपराध करवाना। 
2. षड्यंत्र में शामिल करके अपराध करवाना। 
3. आशय पूरा करवाने के लिए अपराध में सहयोग देकर दुष्प्रेरण करना।

BNS 45, IPC 107 - Important Supreme Court judgements 

▪︎ किशोरी लाल बनाम मध्यप्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दुष्प्रेरण का अपराध तीन प्रकार से किया जा सकता है -
1. किसी व्यक्ति को कोई कार्य करने के लिए उकसाने द्वारा। 
2. षड्यंत्र द्वारा।
3. किसी व्यक्ति को कोई अपराध कार्य में जानबूझकर सहायता पहुंचाकर। 
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:- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद), इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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