BNS 42, IPC 104 - संपत्ति की रक्षा के लिए बल प्रयोग, अपराध या कानूनी अधिकार

Legal general knowledge and law study notes 

कुछ लोग किसी व्यक्ति की निजी संपति पर अवैध कब्जा जमा कर बैठ जाते है और कुछ लोग किसी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर लेते है ऐसे में उनसे भूमि को छुड़ाने के लिए वैध व्यक्ति बाध्य होता है अगर अवैध कब्जा को छुड़ाते हुए अतिक्रमण करने वाले व्यक्ति को गंभीर चोट या समान्य चोट आ जाए तो संपति स्वामी को सजा होगी या माफ़ी मिलेगी जानिए।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 42, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 104 की परिभाषा 

अगर कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति की रक्षा के लिए किसी अतिचार करने वाले व्यक्ति को गंभीर चोट या कम गंभीर चोट पहुंचाता है तो उसे प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार प्राप्त होगा। जैसे कि कोई चोर, चोरी करने के उद्देश्य से, कोई व्यक्ति अवैध कब्जा करने के उद्देश्य से आपराधिक अतिचार करता है।

आईपीसी की धारा 104 संबंध में महत्वपूर्ण जजमेंट :-

1. इन्दर सिंह बनाम सम्राट मामले मे यह विनिश्चित किया गया कि किसी ऐसे व्यक्ति को जिसका पहले से ही भूमि पर स्थाई कब्जा है, उसे IPC की धारा 104 के अंतर्गत अपने कब्जे को यथावत बनाए रखने तथा अतिचारी को बेदखल करने मे निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए मृत्यु से कम चोट पहुंचाने का अधिकार होगा।

2. नेमीचंद बनाम राज्य मामले मे न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि सरकारी भूमि पर आपराधिक अतिचार या रिष्टि रोकने के लिए वनरक्षक को निजी प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग करने का अधिकार होगा। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

:- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद 9827737665), इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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