मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों की कॉन्फ्रेंस में कहा, हड़ताल से पब्लिक को प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए - MP NEWS

मध्य प्रदेश में ड्राइवर संगठन की हड़ताल के बीच, स्थिति जब तनावपूर्ण हो गई तो मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने सभी कलेक्टर और SP को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस हड़ताल के कारण पब्लिक को कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। यह भी कहा कि यदि कोई रास्ता जाम करता है, तो पुलिस नियमानुसार अपना काम करें। 

MP NEWS - ड्राइवर हड़ताल के संदर्भ में मुख्यमंत्री के कलेक्टरों को निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मंत्रालय में कमिश्नर, कलेक्टर और एसपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा कर ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल के संबंध में आवश्यक उपायों की जानकारी प्राप्त की एवं जरूरी दिशा-निर्देश दिए। 
  • यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों को आवश्यक सामग्री के लिए परेशानी न हो, इसके लिए सभी जरूरी उपाय किए जाएं।
  • पेट्रोल - डीजल की सप्लाई में कोई अवरोध न हो।
  • विभिन्न जिलों के कलेक्टर एसपी को निर्देश दिए कि, कोई भी मार्ग पर अवरोध और बाधा न हो, रास्ते की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें।
  • सभी डीलर्स, एसोसिएशन के साथ बैठक करें। 

ड्राइवर हड़ताल के बारे में कांग्रेस का पक्ष

श्री जीतू पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकारें प्रजातंत्र का मख़ौल उड़ाती हैं, जन-माने नहीं मन-माने निर्णय लेने के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में केंद्र की भाजपा सरकार ने भारतीय न्याय संहिता-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक, 2023 पारित किए हैं।

श्री जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इन बिलों के लिए लोकसभा के अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति से भारतीय न्याय संहिता-2023 के बिल की जांच के लिए संसद की एक संयुक्त समिति के गठन की मांग की थी, मगर उसे दर किनार कर दिया गया। मोदी सरकार ने प्रजातांत्रिक व्यवस्था का गला घोटकर, अब ज्यादातर विधेयकों को संसदीय समिति के पास जाँच के लिए भेजना बंद कर दिया हैं, कांग्रेस की सरकारों में 75 प्रतिशत विधेयक कानून बनने के पहले जाँच के लिए संसदीय समितियों को सौंपे जाते थे, मोदी सरकार में अब सिर्फ़ 16 प्रतिशत विधेयक भेजे जाते हैं।

श्री जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय विधेयकों को संबंधित मंत्रालयों की साइट पर डाला जाता था, ताकि आम जनता व्यापक रूप से विमर्श कर सके और प्रभावित पक्ष का अभिमत जाना जा सके। मगर अब मोदी सरकार में मात्र 11 प्रतिशत कानून ही जनता के विमर्श के लिए डाले जाते हैं।

श्री जीतू पटवारी ने कहा कि मोदी सरकार ने कानून पास कराने का एक मनमाना तरीका और निकाला हैं, सरकार बड़ी संख्या में विपक्षी सांसदों को निलंबित कर देती हैं और चुपचाप कानून पास कर लेती हैं।

श्री पटवारी ने बताया कि चाहे किसानों की जमीन हड़पने के अध्यादेश हों, किसानों के खिलाफ काले तीन क्रूर कानून हों यह सब केंद्र की भाजपा सरकार की मनमानियां दर्शाती हैं।

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