BNS 89, IPC 315 - भ्रूण हत्या कितना गंभीर अपराध और कितनी सजा, जानिए legal advice

Legal general knowledge and law study notes

भारत में भ्रूण हत्या निरंतर जारी है। पहले लड़का और लड़की के बीच में भेदभाव के कारण कन्या भ्रूण हत्या हुआ करती थी। अब इस कुरीति से समाज बाहर निकल आया है परंतु शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के कारण बड़े पैमाने पर भ्रूण हत्याएं हो रही है। कानून कहता है कि सबको जीवन का अधिकार है और किसी भी मनुष्य को, किसी भी प्राणी की हत्या करने का अधिकार नहीं है। आईए जानते हैं कि भ्रूण हत्या कितना गंभीर अपराध माना जाता है और इसके लिए कितनी सजा निर्धारित की गई है।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 89 , भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 315 की परिभाषा

भारत में जो कोई मनुष्य, किसी शिशु के जन्म से पहले उसे जीवित पैदा होने से रोकता है या जन्म देने के तुरंत बाद उसे मार देता है, तब उस व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 89 (पूर्व में भारतीय दंड संहिता की धारा 315) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा और समस्त गवाह और सबूत के साथ सजा निर्धारण हेतु सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। नोट:- माता के जीवन बचाने के लिए शिशु को मारवाना दण्डनीय अपराध नहीं होगा।

The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 section 89, Indian Penal Code, 1860 section 315 Punishment

इस धारा के अपराध संज्ञेय एवं अजमानतीय होते हैं। इनकी सुनवाई सेशन कोर्ट द्वारा की जा सकती है। इस धारा के अपराध के लिए अधिकतम आजीवन कारावास, या  दस वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है। विशेष नोट:- नए कानून भारतीय न्याय संहिता, 2023 में यह धारा अब  89 है, एवं दण्ड की शर्तें यथावत है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

:- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 , इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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