BNS 14, IPC 76 - शासकीय कर्मचारी के अपराध को क्षमा कर देने का प्रावधान

Legal general knowledge and law study notes 

हमारी भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय - 4 में साधारण अपवाद दिये गए हैं इनमे कुल मिलाकर 31 धाराओ का समावेश है, ये अपवाद यह बताते हैं कि व्यक्ति द्वारा किया गया अपराध, कब अपराध की श्रेणी में नहीं आता है, लेकिन भारतीय न्याय संहिता, 2023 के नए कानून में इनको अध्याय 03 में बताया गया है, अर्थात किन-किन परिस्थितियों में किया गया अपराध क्षमा योग्य होता है यह जानकारी हम आपको आज से हमारी भारतीय दण्ड संहिता की सीरिज में बताएंगे।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 14, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 76 की परिभाषा 

अगर किसी व्यक्ति या लोकसेवक जो विधि के नियमों के अनुसार कार्य कर रहा है एवं उसके द्वारा तथ्यों की भूल के कारण कोई अपराध हो जाता है, अर्थात किसी घटना या परिस्थितियों को देखते हुए विधि का पालन करते हुए कोई अपराध का होना, तब ऐसे अपराध को धारा 76 के अनुसार क्षमा योग्य माना जायेगा।

सरल शब्दों में उदाहरण 
यदि किसी हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मजिस्ट्रेट हवाई फायर के ऑर्डर देता है और इस दौरान किसी हाईराइज बिल्डिंग की छत पर खड़े किसी व्यक्ति को गोली लग जाती है, तब इस प्रकार की अपराध को भारतीय न्याय संहिता की धारा 14 के तहत क्षमा योग्य माना जाएगा।

कोई डॉक्टर किसी मरीज की जान बचाने के लिए कोई दवा देता है परंतु उसी दवा के कारण मरीज की मृत्यु हो जाती है तो BNS 14, IPC 76 के तहत डॉक्टर के अपराध को क्षमा कर दिया जाएगा, क्योंकि वह डॉक्टर सद्भावनापूर्वक यह विश्वास करता था कि दवा, मरीज की जान बचाएगी। 

The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 section 14, Indian Penal Code, 1860 section 76 Punishment 

यदि कोई अपराधी किसी व्यक्ति की हत्या करने वाला है अथवा अपहरण करके भाग रहा है और कोई पुलिस कर्मचारी हत्या के अपराध को रोकने अथवा अपहरण को रोकने के लिए अपराधी पर बल प्रयोग करता है, अथवा दूर होने की स्थिति में गोली मार देता है। ऐसी स्थिति में उसे पुलिस कर्मचारियों को BNS 14, IPC 76 के तहत अपराध मुक्त कर दिया जाएगा, क्योंकि पुलिस कर्मचारी विधि द्वारा अपराध को रोकने के लिए नियुक्त किया गया है और वह सद्भावनापूर्वक विश्वास करता है कि वह एक कानूनी कार्य कर रहा है। 

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि BNS 14, IPC 76 केवल तभी लागू होती है जब व्यक्ति सद्भावपूर्वक विश्वास करता है कि वह कानून द्वारा बाध्य है। यदि व्यक्ति का विश्वास जानबूझकर झूठा है, तो वह BNS 14, IPC 76 के तहत अपराध से मुक्त नहीं होगा। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

:- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 , इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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