फर्जी EWS सर्टिफिकेट मामले में जबलपुर कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को हाई कोर्ट का नोटिस

आलीशान निजी मकान होने के बावजूद EWS सर्टिफिकेट के माध्यम से उच्च शिक्षक की नियुक्ति मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ओर से जबलपुर के कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है। पूछा गया है कि उन्होंने नियुक्ति देने से पहले EWS की पात्रता का परीक्षण किया था या नहीं। 

संजीव अग्रहरि की अधिकार प्रच्छा रिट पर कार्रवाई

जबलपुर स्थित हाई कोर्ट ऑफ़ मध्य प्रदेश में याचिकाकर्ता संजीव अग्रहरि द्वारा अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के माध्यम से अधिकार प्रच्छा रिट (Quo Warranto) दायर करके अना.करि.6 द्वारा, श्रीमती दीप्ति अग्रहरि की उच्च शिक्षक के पद पर हुई नियुक्ति की वैधानिकता को चुनौती दीं गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि महिला शिक्षक के पति राजीव अग्रहरि के नाम से सयुंक्त स्वामित्व की नगर निगम सीमा में अचल संपत्ति है तथा स्वयं के नाम के आवास के मकान को कूटरचित किरायानामा बनाकर, एवं शपथ पत्र पर झूठी जानकारी देकर, EWS प्रमाण पत्र हासिल किया गया है, जिन्हे तहसीलदार द्वारा, आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का न तो भौतिक सत्यापन किया और न ही संबंधित पटवारी एवं पार्षद की कोई रिपोर्ट तलब की गई। 

तहसील रांझी के तहसीलदार द्वारा दिनांक 15/9/22 को महिला आवेदक दीप्ति आग्रहरी पति राजीव अग्रहरि निवासी शीतलामाई वार्ड का आवेदन, अपात्र होने से 15/9/22 को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद फर्जी दस्तावेज बनाकर पुनः तहसीलदार जबलपुर के कार्यालय से दिनांक 07/10/2022 को EWS प्रमाण पत्र हासिल करके उच्च शिक्षक के पद पर सरकारी नौकरी हासिल कर ली गई है। उक्त याचिका क्रमांक 30488/2023 की प्रारंभिक सुनवाई जस्टिस राजमोहन सिंह द्वारा की गई। 

अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर द्वारा कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा विधि विरुद्ध, शासकीय कार्यालय में लोक पद प्राप्त किया गया है। जिसे उक्त पद से प्रथक किए जाने हेतु भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रस्तुत याचिका में अनावेदक क्रमांक 6 के विरुद्ध अधिकार प्रच्छा रिट जारी करने का अधिकार है, कि किस हैसियत से अनावेदक क्रमांक 6, लोक पद धारित किए हुए है ? 

अधिवक्ता द्वारा कोर्ट को बताया गया कि अनावेदक क्रमांक 6 (महिला शिक्षक श्रीमती दीप्ति अग्रहरि) द्वारा EWS प्रमाण पत्र हेतु प्रस्तुत समस्त दस्तावेज सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त किए गए है, जिसमे फर्जी किरायानामा तथा झूठा शपथ पत्र सलग्न किया गया है। इस प्रकार के सम्पूर्ण मध्य प्रदेश में कई मामले है। हाल ही में ग्वालियर हाईकोर्ट द्वारा शिक्षक भर्ती में विकलांग कोटा से नौकरी प्राप्त करने वाले समस्त अभ्यर्थियों के विकलांगता प्रमाण पत्र की जाँच तथा परिक्षण करने का आदेश दिया गया है। ठीक इसी प्रकार प्रदेश के शिक्षक भर्तियों में हजारों की संख्या में फर्जी EWS प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्तियां की गई है, जिसकी जनहित में प्रदेश स्थरीय जाँच टीम गठित किया जाना आवश्यक है। 

अधिवक्ता के उक्त तर्कों को गंभीरता पूर्वक लेते हुए हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, कमिश्नर लोक शिक्षण, कलेक्टर जबलपुर, जिला शिक्षा अधिकारी जबलपुर, तहसीलदार जबलपुर, सहित अनावेदक क्रमांक 6 को कारण बताओ नोटिस जारी कर जबाब तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने की।  

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