MPPSC ने सिर्फ़ तीन दिवसीय कोर्स कह कर DCI-IOS द्वारा मान्य सर्टिफिकेट अमान्य कर दिया - NEWS TODAY

Madhya Pradesh Public Service Commission Indore द्वारा दन्‍त चिकित्‍सा विशेषज्ञ चयन परीक्षा 2022 के अंतर्गत कई अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी निरस्त कर दी थी। इनमें से 18 अभ्यर्थियों ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की इस कार्रवाई को चैलेंज किया था परंतु मध्य प्रदेश पीएससी ने उनके आपत्ति अभ्यावेदन भी रिजेक्ट कर दिए हैं। इन्हीं में से एक उम्मीदवार डॉ आशीष कुशवाहा ने एमपी लोक सेवा आयोग की कार्रवाई को दोषपूर्ण बताते हुए उसे सक्षम न्यायालय में चुनौती देने की बात की है। 

डेंटल कौंसिल ऑफ़ इंडिया किसी भी तरह का डीएनबी कोर्स नहीं करवाती

डॉ. आशीष कुशवाह ने भोपाल समाचार डॉट कॉम को बताया कि MPPSC द्वारा दंत चिकित्सक विशेषज्ञ के पद हेतु विज्ञापन क्रमांक 09/2022/17.08.2022 निकाला गया था, जिसमें अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यता की श्रेणी में अपनी स्पेशलिटी में PG diploma/ certificate course/ fellowship/ DNB माँगे हुए थे जिनके 5 अंक निर्धारित किए गये थे। चूँकि डेंटल कौंसिल ऑफ़ इंडिया किसी भी तरह का डीएनबी कोर्स नहीं करवाती अतः डीएनबी वाला बिंदु स्वतः ही योग्यता के मापदंड से बाहर हो जाता है। 

MDS एक तीन वर्षीय स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स है और PG diploma मात्र दो वर्षीय कोर्स। अतः विशेषज्ञ पद के लिए MDS डिग्री धारक उम्मीदवार के लिए उसी स्पेशलिटी में दो वर्षीय डिप्लोमा मान्य नहीं होता है। चूँकि आयोग ने DCI द्वारा मान्यता प्राप्त फेलोशिप को भी इस श्रेणी में रखा है और दंत चिकित्सा की नौ स्पेशलिटी की शाखा में प्रत्येक में फेलोशिप नहीं करवायी जाती है। अतः यह बिंदु भी सिलेक्शन मापदंड की दृष्टि से पक्षपात पूर्ण है।

सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि का उल्लेख विज्ञापन में नहीं किया है

अब बात आती है अंतिम पर मुख्य बिंदु “सर्टिफिकेट कोर्स” की, जिसकी वजह से आयोग ने कई उम्मीदवारों के आवेदन निरस्त किए। चूँकि आयोग ने सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि का उल्लेख विज्ञापन में नहीं किया है तथा DCI द्वारा भी सर्टिफिकेट कोर्स की कोई सीमावधि नहीं बतायी हुई है, अतः अलग-अलग दंत विशेषज्ञ शाखा में आयोजित सर्टिफिकेट कोर्स स्टेट डेंटल कौंसिल द्वारा मान्य होने के बाद उन्हें CDE (continuing dental education) पॉइंट प्रदान किए जाते हैं। स्टेट डेंटल कौंसिल, DCI की एक शाखा है जो भारत में अलग अलग राज्यो में दंत चिकित्सकों को डीसीआई द्वारा निर्धारित नियमावली के अनुसार संचालित करती है। 

कोर्स की अवधि को लेकर सर्टिफिकेट रिजेक्ट कर दिया गया है

हमारे द्वारा भी “सर्टिफिकेट कोर्स” योग्यता के अन्तर्गत लगाया गया। सर्टिफिकेट “हितकारिणी डेंटल कॉलेज” द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कोर्स जिसे स्टेट डेंटल कौंसिल द्वारा मान्यता प्रदान कर 18 CDE पॉइंट प्रदान किए गये थे तथा इस सर्टिफिकेट कोर्स को दांतचिकित्सा की ऑर्थोडोंटिक्स शाखा के एकमात्र संगठन “इण्डियन ऑर्थोडोंटिक सोसाइटी” द्वारा भी मान्यता प्रदान की गई थी। अतः इस सर्टिफिकेट कोर्स में पूरे भारत से ऑर्थोडोंटिस्टों ने भाग लिया। यह सर्टिफिकेट डीसीआई एवं इण्डियन ऑर्थोडोंटिक सोसाइटी (IOS) दोनों के द्वारा मान्य है। अतः सिर्फ़ तीन दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स कह कर इसे अमान्य करना निराधार एवं डीसीआई और इंडियन ऑर्थोडोंटिक सोसाइटी के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। 

डॉ अभिषेक कुशवाहा द्वारा यह सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया गया


एमपीपीएससी ने यह कारण बता कर रिजेक्ट कर दिया



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