Article 50- जो न्यायपालिका को विधायिका एवं कार्यपालिका से पृथक और स्वतंत्र करता है

Bhopal Samachar
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article 50 of indian constitution in hindi

भारत में कानून का राज है, जो भी होता है नियम अनुसार होता है, कानून की नजर में सब समान है, कानून अपना काम करेगा, ऐसे कई सारे डायलॉग आपने सुने होंगे परंतु क्या आप जानते हैं कि यह सारे डायलॉग और कानून की ताकत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 50 के कारण है। आर्टिकल 50 ही न्यायपालिका को विधायिका एवं कार्यपालिका से पृथक और स्वतंत्रता है। इसी के कारण भारत में कानून का राज है और दुनिया के सबसे बड़े देश में लोकतंत्र ना केवल सुरक्षित है बल्कि शक्तिशाली भी है। सबसे पहले हम आपको सरल भाषा में बताते हैं कि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका क्या होती है। 

विधायिका क्या होती है 

केंद्रीय स्तर पर संसद एवं राज्य स्तर पर विधानमंडल, दोनों को विधायिका कहा जाता है, इसमें सांसद एवं विधायक सत्ता पक्ष के मंत्री सभी मिलकर कानून, विधेयक, विनियम आदि का निर्माण करते हैं। यही विधायिका का मुख्य कार्य होता है। अर्थात विधायिका का कार्य कानून बनाना होता है।

कार्यपालिका क्या होती है 

जब विधायिका (संसद अथवा विधानसभा) किसी क़ानून का निर्माण करती है तो उसे लागू करने का काम काम कार्यपालिका का होता है। कार्यपालिका ही जनता को बताती है कि नया कानून बन गया है और कार्यपालिका ही जनता को अनुशासन में रखने के लिए प्रतिबद्ध होती है। कार्यपालिका में कलेक्टर-एसपी और उसके नीचे के सभी कर्मचारी एवं कलेक्टर-एसपी और उसके ऊपर के सभी अधिकारी आते हैं। यह सभी योग्यता के आधार पर भारतीय सेवा अथवा राज्य सेवा संवर्ग में चयनित होते हैं।

न्यायपालिका क्या होती है

जब कोई कानून विधायिका द्वारा बना दिया गया है एवं कार्यपालिका द्वारा उसे लागू करवा दिया जाता है, और वह कानून, भारत के संविधान के किसी भी शब्द अथवा भाग का उल्लंघन करता है तो न्यायपालिका द्वारा ऐसे कानून को निरस्त कर दिया जाता है। दूसरी तरफ यदि कार्यपालिका यह दावा करती है कि किसी नागरिक ने कानून का उल्लंघन कर दिया है तो वह दोषी है अथवा निर्दोष है, इस बात का निर्धारण न्यायपालिका करती है। कानून के उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान कानून बनाने वाली विधायिका द्वारा किया जाता है परंतु दोषी को कितना दंड दिया जाना है, इसका निर्धारण न्यायपालिका करती है। न्यायपालिका एकीकृत होती है अर्थात सुप्रीम कोर्ट से लेकर स्थानीय न्यायालय तक सब कुछ न्यायपालिका के अंतर्गत आता है।

और अधिक सरल शब्दों में समझते हैं 

किसी नागरिक की हत्या करना अपराध है (यह कानून विधायिका बनाती है)। 
आम नागरिकों को इसकी जानकारी देना और यदि कोई हत्या करता है तो उसे पकड़कर न्यायालय में प्रस्तुत करना (यह काम कार्यपालिका का है)। 
प्रस्तुत किए गए व्यक्ति ने हत्या की है या नहीं और यदि अपराध किया है तो उसे कितना दंड दिया जाना है (यह निर्धारण न्यायपालिका द्वारा किया जाता है।)

न्यायपालिका, को विधायिका और कार्यपालिका से अलग क्यों रखा जाता है जानिए।


भारतीय संविधान अधिनियम,1950 के अनुच्छेद 50 की परिभाषा

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 50 राज्य से यह अपेक्षा करता है की राज्य लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक (अलग) करने के लिए कदम उठाएगा। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665

इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com
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