MPTET VARG 1 TOPIC- पैडागॉजी संबंधी मुद्दे - Pedagogical issues PART 1

Bhopal Samachar
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एमपीटैट वर्ग 1 2023 परीक्षा का आयोजन मार्च 2023 में प्रस्तावित है। इस परीक्षा मैं प्रश्नपत्र को दो भागों में विभाजित किया गया है। फर्स्ट पार्ट 30 अंकों का होगा एवं सेकंड पार्ट 120 अंकों का विषयआधारित होगा। फर्स्ट पार्ट में हिंदी,इंग्लिश, सामान्यज्ञान, तार्किक एवं आंकिक योग्यता एवं शिक्षाशास्त्र से संबंधित 30 अंकों के 30 प्रश्न पूछे जाएंगे।  शिक्षाशास्त्र के Syllabus को अंतर्गत चार टॉपिक दिए गए है, जिससे 10 अंकों के 10 प्रश्न पूछे जाएंगे। हम यहाँ शिक्षाशास्त्र (Pedagogy) से संबंधित सभी टॉपिक्स को एक -एक करके डिस्कस करेंगे। MPTET VARG 1 सिलेबस के लिए यहाँ क्लिक करें। (MPTET VARG 1 SYLLABUS - मध्य प्रदेश उच्च शिक्षक पात्रता परीक्षा का सिलेबस)

TOPIC पाठ्यचर्या: अर्थ, सिद्धांत, पाठचर्या संगठन के प्रकार, दृष्टिकोण 

पाठ्यचर्या(Curriculum)-Latin भाषा के शब्द Currere से बना है, जिसका अर्थ होता है"दौड़ का मैदान" "RACE COURSE" जिसमें दौड़- छात्रों की क्रियाएं हैं, जबकि मैदान- पाठ्यक्रम(Syllabus) है। पाठ्यचर्या विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था का केंद्र बिंदु होता है। विद्यालय में उपलब्ध होने वाले सभी संसाधन जैसे- स्कूल बिल्डिंग, उपकरण, किताबें, अन्य शिक्षण सामग्री आदि का एकमात्र उद्देश्य पाठ्यचर्या का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन करना होता है। 

जॉनडीवि (John Dewey) के अनुसार -शिक्षण एक त्रिध्रुवीय प्रक्रिया (Tripolar Process) है जिसमे शिक्षक (Teacher), शिक्षार्थी (Student) और पाठ्यचर्या (Curriculum) महत्वपूर्ण होते हैं। 
मुनरो के अनुसार "पाठ्यक्रम में वे सभी क्रियाएं शामिल होती हैं, जिनका प्रयोग शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विद्यालय में किया जाता है।" 
माध्यमिक शिक्षा आयोग (Secondary Education Commission) के अनुसार "पाठ्यक्रम का अर्थ केवल रूढ़िवादीव ढंग से पढ़ाए जाने वाले बौद्धिक विषयों से नहीं है, बल्कि उससे वे सभी क्रियाकलाप आ जाते हैं जो छात्रों को कक्षा के अंदर व बाहर प्राप्त होते हैं।"

पाठ्यचर्या के निर्माण के सिद्धांत 

प्रत्येक सभ्य समाज अपने युवा पीढ़ी के सामाजीकरण के लिए एक निश्चित शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन करता है। जिसका क्रियान्वयन विद्यालय के माध्यम से किया जाता है। इस प्रक्रिया में किन बातों का समावेश हो तथा इन्हें शैक्षिक व्यवहार और क्रियाओं के रूप में कैसे परिवर्तित किया जाए। इसका पूरा ध्यान रखा जाना आवश्यक है। पाठ्यचर्या निर्माण के मुख्य रूप से चार आधार होते हैं। सामाजिक शक्तियां, मानवीय विकास का ज्ञान, अधिगम का स्वरूप तथा ज्ञान और संज्ञान का स्वरूप। 
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005(National Curriculum Framework,2005) का उद्देश्य बालकों का सर्वांगीण विकास करना है। इसके लिए कुछ प्रमुख सिद्धांतो को ध्यान में रखना आवश्यक है- 
1. विविधता तथा लचीलेपन का सिद्धांत 
2. बालकेंद्रिता का सिद्धांत 
3. उपयोगिता का सिद्धांत 
4.रचनात्मक तथा सृजनात्मकता का सिद्धांत
5. सहसंबंध का सिद्धांत
6. विविधता का सिद्धांत 
7. लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास का सिद्धांत 
8. जीवन से संबंधित होने का सिद्धांत 
9. रूचि तथा स्तर का सिद्धांत 
10. अतीत के संरक्षण का सिद्धान्त 
11. भविष्य चेतना का सिद्धांत 
12. शैक्षिक उद्देश्यों को अनुरूपता का सिद्धांत 
अतः पाठ्यचर्या का निर्माण उपरोक्त सभी सिद्धांतों को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।
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