Online legal advice- देर से FIR के कारण मेडिकल में रेप साबित ना हो, तो क्या रेपिस्ट छूट जाएगा

Bhopal Samachar
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कई बार ऐसा होता है, बलात्कार की घटना के काफी समय बाद मामला दर्ज कराया जाता है। आजकल तो शातिर अपराधी किडनैपिंग के बाद रेप करते हैं और फिर कुछ ऐसा करते हैं जिससे मेडिकल में रेप साबित ना हो। कभी-कभी पुलिस वाले भी कहते हैं कि मेडिकल में कुछ नहीं आएगा, वह कोर्ट से छूट जाएगा, FIR दर्ज करने का फायदा नहीं है। सवाल यह है कि क्या सिर्फ मेडिकल में फेल हो जाने के कारण दुष्कर्म नहीं माना जाएगा। बलात्कारी को दोष मुक्त घोषित कर दिया जाएगा। आइए पढ़ते हैं कुछ महत्वपूर्ण जजमेंट, जो इस सवाल का जवाब देते हैं:- 

1. शाम सिंह बनाम हरियाणा राज्य (निर्णय वर्ष 2018):- 

उक्त मामले में न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया है कि यदि पीड़ित महिला के कथनों (बयानों) में विश्वास झलकता है एवं महिला विश्वसनीय साक्ष्य बता रही है तब पीड़िता के साक्ष्य मात्र के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।

2. रंजीत हज़ारिका बनाम आसाम राज्य(निर्णय वर्ष 1998) :- 

उक्त मामले में न्यायालय द्वारा कहा गया की यौन शोषण की शिकार महिला के साक्ष्यों, बयानों की सम्पुष्टि करने के लिए कहना या उनको अनिवार्य बनाना उनके जख्मो के अपमान को बढ़ाने के समान हैं।

3. गणेशन बनाम राज्य (2020) एवं राज्य बनाम पंकज चौधरी (निर्णय वर्ष  2019):- 

उक्त मामलों में न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया कि सामान्य नियम यही है कि यदि पीड़िता का साक्ष्य विश्वसनीय है तो उसके साक्ष्य मात्र पर आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।

एक ओर महत्वपूर्ण जजमेंट:- फूल सिंह बनाम मध्यप्रदेश राज्य(निर्णय वर्ष 2021) :- 

उक्त मामले में पीड़ित महिला 376 (बलात्कार) के आरोपी की शिकायत देर से दर्ज करवाती है एवं मेडिकल परीक्षण में महिला के साथ बलात्कार हुआ है यह सिद्ध नहीं हो पता। तब न्यायालय महिला के विश्वसनीय बयान, कथन एवं साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को बलात्कार के अपराध का दोषी सिद्ध कर देता है। आरोपी मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट को आधार बनाकर उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय में अपील करता है लेकिन आरोपी की अपील खारिज कर दी जाती है।

आर्थत उपर्युक्त सभी जजमेंट के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि अगर महिला किसी कारणवश 376 के अपराध की एफआईआर दर्ज करवाने में देर हो जाए एवं मेडिकल परीक्षण के आरोप सिद्ध नहीं हो पाता है तो विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध हो जाता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665

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