MP NEWS- गुजरात और हिमाचल के बाद मध्यप्रदेश में शिवराज की समीक्षा और पूर्वानुमान शुरू

भोपाल
। वैसे तो मध्य प्रदेश का गुजरात और हिमाचल प्रदेश से कोई खास राजनीतिक रिश्ता नहीं है लेकिन दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की समीक्षा और पूर्वानुमान का दौर शुरू हो गया है। दरअसल, भाजपा ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में दो अलग-अलग फॉर्मूले टेस्ट किए। दोनों के परिणाम सामने आ चुके हैं। अब मध्यप्रदेश में विधानसभा का चुनाव आने वाला है। बड़ा सवाल यह है कि भारतीय जनता पार्टी यहां कौन सा फार्मूला यूज़ करेगी। 

भाजपा का गुजरात चुनाव फार्मूला क्या था

गुजरात में 27 साल से भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। स्वभाविक सरकार के खिलाफ जनता में माहौल बन ही जाता है। गुजरात में भी बन गया था लेकिन भाजपा की केंद्रीय कमान ने चुनाव के पहले मुख्यमंत्री से लेकर लगभग सभी दागी मंत्रियों को पद से हटा दिया। नए चेहरे सामने आ गए। टिकट वितरण से पहले भी भाजपा के कई नेताओं को मनमोहन कर दिया गया था। उन्होंने कुछ चुनाव लड़ने से इनकार किया। 

विधानसभा चुनाव का एक नया रिकॉर्ड

चुनाव के समय मैदान में पार्टी पुरानी थी लेकिन प्रत्याशी नए थे। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने पूरी ताकत लगा दी थी। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने 182 में से 156 सीटों पर जीत हासिल कर एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया जिसे शायद भाजपा भी नहीं तोड़ पाएगी। 

भाजपा का हिमाचल प्रदेश फार्मूला क्या था

भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय कमान में से एक राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा हिमाचल प्रदेश से आते हैं। यहां पर पार्टी ने ना तो जनता का मूड पता किया और ना ही कार्यकर्ताओं से कोई रायशुमारी की गई। जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर पर भरोसा किया गया। नतीजा सबके सामने है। अपनी विफलता को छुपाने के लिए बहाना कुछ भी बनाया जा सकता है परंतु चुनाव परिणाम कहता है कि भारतीय जनता पार्टी हार गई। 

भाजपा का मध्यप्रदेश में क्या फार्मूला होगा

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की मिलीजुली स्थिति है। गुजरात की तरह मध्यप्रदेश में भी भाजपा लंबे समय से सत्ता में है और हिमाचल प्रदेश की तरह मध्यप्रदेश में भी भाजपा कुछ चुनिंदा नेताओं के हाथ में है। इसमें कोई दो राय नहीं कि शिवराज सिंह चौहान भाजपा के सबसे लोकप्रिय नेता है लेकिन यह भी मानना होगा कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के प्रति नाराज जन समूह और भाजपा कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है। 

2018 के चुनाव में भाजपा को ज्यादा वोट मिले थे फिर भी सरकार नहीं बना पाए थे। मध्य प्रदेश की जनता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की पार्टनरशिप वाली सरकार नहीं चाहती लेकिन यदि शिवराज सिंह चौहान के प्रति नाराजगी के कारण भाजपा का वोट प्रतिशत कम हो गया तो चुनाव परिणाम अप्रिय भी हो सकते हैं। यहां एक-एक वोट महत्वपूर्ण है और मध्य प्रदेश सरकार में कुछ मंत्रियों, विधायकों और मुख्यमंत्री का आशीर्वाद प्राप्त नौकरशाह के व्यवहार के कारण हर रोज नुकसान हो रहा है। 

अब देखना यह है कि भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय कमान क्या डिसीजन बनाता है। फिलहाल तो शिवराज सिंह की समीक्षा और उनके भविष्य को लेकर पूर्वानुमान का दौर जारी है।