ड्रिंक एंड ड्राइव मामले में चालान कटता है या जेल भी जाना पड़ता है, यहां पढ़िए- MV Act,1988

बहुत सारे लोग खासकर कॉलेज स्टूडेंट्स इसके बारे में नहीं जानते। उनका मानना होता है कि हमारी गाड़ी और हमारा ड्रिंक, कोई हमें कैसे रोक सकता है। कुछ लोग तो ड्राइव करते हुए ड्रिंक करना पसंद करते हैं। शायद उन्हें लगता है कि ट्रैफिक रूल तोड़ने से फाइन ही तो भरना पड़ता है, पकड़े गए तो भर देंगे। आइए जानते हैं कि ड्रिंक एंड ड्राइव मामले में क्या कानूनी कार्रवाई होती है।

मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 185 की परिभाषा:-

जो कोई व्यक्ति किसी मोटर यान (वाहन, व्हीकल) को चलाते समय या चलाने का प्रयत्न करते समय व्यक्ति के शरीर में शराब के कारण 30 मिमीग्राम से अधिक एल्कोहल पाया जाता है।
या किसी प्रकार से अफीम, गांजा, ड्रग्स आदि का नशा शरीर में पाया जाता है। तब ऐसे व्यक्ति को मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 185 के अंतर्गत प्रथम बार दोषसिद्ध होने पर अधिकतम छः माह कारावास या दस हजार रुपए जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।

अगर यही अपराध व्यक्ति दोबारा करता है तब अधिकतम 2 वर्ष की कारावास या पंद्रह हजार रुपये जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जा सकता है।

नोट:- उपर्युक्त धारा के अंतर्गत शराब पीकर वाहन चलाने मात्र पर दण्डित करने का प्रावधान होगा किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने आवश्यक नहीं है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

:- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665
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