यदि कोई ड्राइवर वाहन चलाने से मना कर दे तो क्या कार्रवाई होगी, पढ़िए MV Act,1988

कभी-कभी ऐसा हो जाता है जब कोई यात्री वाहन का ड्राइवर उस समय वाहन चलाने से मना कर देता है जबकि वाहन यात्रियों से भरा हो। ज्यादातर लोगों को नियमों की जानकारी नहीं होती इसलिए वह दबाव में आ जाते हैं और ड्राइवर की मांग पूरी कर देते हैं, लेकिन हम बताते हैं कि ड्राइवर द्वारा ऐसा करना मोटर यान अधिनियम 1988 के तहत दंडनीय अपराध है।

मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 178 की परिभाषा:-

• जो कोई व्यक्ति बिना टिकिट या बिना वैधानिक यात्रा पास के यात्री वाहन में सवारी या यात्रा करेगा।
• या कोई कंडक्टर किसी यात्री को जानबूझकर कर टिकिट या पास नहीं देगा या देने से इनकार करेगा या किसी प्रकार की अवैध टिकिट काटेगा।
• कोई सवारी गाड़ी का चालक किसी परिमिट धारक गाड़ी को चलाने से तब इनकार करेगा जब गाड़ी यात्रियों से भरी हो।

उपर्युक्त कृत्य करने वाला यात्री, चालक या कंडक्टर अधिनियम धारा 178 के अंतर्गत जुर्माना जो अधिकतम 500 रुपये से दंडनीय होगा। ड्राइवर व कंडक्टर यदि शासकीय कर्मचारी हैं तो उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू होगी और उन्हें बर्खास्त भी किया जा सकता है। यदि प्राइवेट कर्मचारी हैं तो उनके लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

:- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665
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