कर्तव्य से चूकने वाले पुलिस अधिकारियों को जेल का प्रावधान, पढ़िए Police Act,1861

Bhopal Samachar
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यदि राज्य शासन के किसी अन्य विभाग का कोई अधिकारी अथवा कर्मचारी अपने कर्तव्य से जानबूझकर चूक जाता है, तब उसे सस्पेंड करके विभागीय जांच करने एवं दोषी पाए जाने पर सेवाएं समाप्त करने का प्रावधान होता है परंतु पुलिस डिपार्टमेंट में नियम अलग हैं। यहां आपराधिक लापरवाही के लिए जेल भेजने का प्रावधान भी है।

पुलिस विभाग के अधिकारी पुलिस एक्ट 1861 के अधीन होते हैं एवं पुलिस एक्ट में दर्ज कर्तव्यों का पालन करने के लिए बाध्य होते हैं। यदि किसी गंभीर परिस्थिति में आवश्यकता पड़ने पर पुलिस अधिकारी कर्तव्य निभाने से (कायरता के कारण या फिर किसी अपराधी को मौका देने के लिए) पीछे हट जाता है, तब ऐसे अधिकारी को जेल भेजने का प्रावधान भी है।

यहाँ हम एक बात स्पष्ट कर दे की अधिनियम के अनुसार पुलिस अधिकारी से तात्पर्य- पुलिस दल के सभी कर्मचारियों से है चाहे वह किसी भी पद पर नियुक्त किए गए हो【AIR,1929 लाहौर 325】। इन पुलिस अधिकारी के क्या कर्तव्य है जानिए।

पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 23 की परिभाषा:-

प्रत्येक पुलिस अधिकारी का कर्त्तव्य है कि-
1. किसी सक्षम अधिकारियों द्वारा उसे विधिपूर्ण जारी किए गए सभी आदेशों एवं वारण्ट का पालन या निष्पादन करे।
2. लोकशान्ति को प्रभावित करने वाली गुप्त बातों का संग्रहण एवं सूचना करे।
3. अपराधों और लोक न्याय के लिए जाने का निवारण करे, अपराधियों का पता लगाएं एवं उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
4. उन सभी आरोपियों या व्यक्तियों को गिरफ्तार करें जिन्हें पकड़ने के लिए वैध अधिकार प्राप्त है।
5. बिना वारण्ट के मदिरालय, जुआघर, भ्रष्ट या अश्लील कार्यक्रम वाले स्थान पर अवैध एवं गलत कार्यो को रोकें।
6. किसी भी हस्तक्षेप प्रकरणों में अगर बंदी बनाए बिना अपराध नहीं रुक सके तब पुलिस अधिकारी, आरोपी को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के अंतर्गत बंदी बना सकते हैं।

कर्तव्य उपेक्षा के लिए दण्ड का प्रावधान

कोई भी पुलिस अधिकारी उपर्युक्त अधिनियम की धारा-23 एवं अपने कर्तव्य को जानबूझकर भंग करने के लिए छुट्टी ले लेता हैं, जो बिना ठोस कोई कारण के या बिना अपने प्राधिकारी की आज्ञा के किसी भिन्न नियोजन में लग जाता है, या कायरता के कारण अपने कर्तव्य से पीछे हट जाता है, या पुलिस अभिरक्षा में आरोपी पर अवैध शारिरिक हिंसा करता है, तब किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा (पुलिस सिपाही) एवं प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा (सिपाही से ऊपर की पंक्ति के कोई भी अधिकारी) की सुनवाई की जाएगी। 

सजा- उपर्युक्त कर्तव्य उपेक्षा का दण्ड का प्रावधान पुलिस एक्ट, 1861 की धारा 29 के अनुसार अपराधी पुलिस अधिकारी को अधिकतम तीन माह की कठोर कारावास या अधिकतम तीन माह के वेतन से वांछित किया जा सकता है या दोनों सजा से दण्डित किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण नोट:- भ्रष्ट या कर्तव्य उपेक्षा के लिए लोकसेवक को अलग अलग विधि के अनुसार भी दण्डित किया जाएगा। (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

:- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665
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