अच्छा वक्ता बनना है तो ये गलतियां सुधारिये, आत्मविश्वास के साथ सटीक ढंग से अपनी बात रखना सीखिए - Life Management

शक्ति रावत।
किसी महान दार्शनिक ने क्या खूब कहा है कि इंसान बोलना तो जन्म के सालभर के अंदर सीख जाता है, लेकिन कब क्या और कैसे बोलना यह पूरे जीवनभर नहीं सीख पाता। दरअसल पूरे आत्मविश्वास के साथ सटीक ढंग से अपनी बात रखना एक कला है। जिसकी जानकारी ज्यादातर लोगों को नहीं होती। बहुत से लोग सामने वाले को अपनी बात ठीक से समझा ही नहीं पाते जिससे वे परेशान रहते हैं। हालांकि यह कोई एेसी कला नहीं है, जो इतनी कठिन हो की सीखी ही ना जा सके। बातचीत के ढंग में थोड़ा सा बदलाव करके आप आसानी से प्रभावशाली ढंग से अपनी बात रखना सीख सकते हैं। तो आईये लाइफ मैनेजमेंट के इस चैप्टर में आज बात बातचीत के सही तरीके से जुड़े टिप्स की। बातचीत के दौरान इन गलतियों से बचिये।

1- एक शब्द में मत दीजिये उत्तर

यह गलती आमतौर पर लोग बातचीत में करते हैं, जब सामने वाला आपकी बात गौर से सुन रहा हो या आपको कुछ कहना चाह रहा हो तब आप एक शब्द में या छोटा उत्तर देकर बात बिगाड़ देते हैं। क्योंकि इससे बात आगे बढ़ ही नहीं पाती। यह गलती बिजनेस, नौकरी या संबध सब जगह लागू होती है। इसके उलट छोटी सी बात के जबाव में लंबा उत्तर देना भी ठीक नहीं। लिहाजा संतुलित शब्दों का उपयोग कीजिये आपकी बातचीत प्रभावी बनेगी।

2- बात करते वक्त फोन पर ध्यान

यह समस्या इन दिनों सबसे आम हैं, लोग बातचीत के बीच भी अपने सेल फोन पर व्यस्त रहते हैं, इससे सामने वाले को लगता है कि उसे महत्व नहीं दिया जा रहा है इससे आपका बनता हुआ काम भी बिगड़ सकता है। इससे आपकी छवि तो खराब होती ही है। सामने वाले व्यक्ति पर आपकी कही गई बात का असर भी ज्यादा नहीं होता।

3- ठीक ढंग से बात खत्म नहीं करना

इस कहते हैं, क्लोजिंग स्टेटमेंट जब हम किसी विषय पर किसी से बात कर रहे हों, तब यह जरूरी हो जाता है कि उस बात को सही जगह पर सही शब्दों के साथ खत्म किया जाए। लेकिन अधिकांश लोग इस पर ध्यान नहीं देते। आप किसी के घर से लौटते समय किसी विजनेस मीटिंग या किसी दोस्त से बात करते हुए अपना क्लोजिंग स्टेटमेंट नहीं देते तो आपकी बात असरदार नहीं रह जाती। लिहाजा अपनी बात को आपके साथ बहुत अच्छा लगा, या आपसे बात करके मन हलका हो गया या फिर हम आगे भी मिलना चाहेंगे। जैसे सटीक शब्द बोलकर अपनी बात खत्म करें।

4- तौलिए फिर बोलिए

हमारे बुर्जुग सदियों से यह सूत्र देते रहें हैं। लेकिन हम मानते नहीं और नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर आप किसी करीबी की शादी में गए और आपने वहां खाने  या किसी और चीज को लेकर कमेंट कर दिया। जबकि उस जगह उस सलाह या कमेंट की जरूरत ही नहीं थी। इससे सामने वाले को भी ठेस पहुंची और बाद में आपको भी पछतावा हुआ। इसलिये जरूरी है, कुछ भी बोलने से पहले एक बार सोच लें कि जो मैं यहां बोलने जा रहा हंू। यहां यह कहने की जरूरत है भी या नहीं।- लेखक मोटीवेशनल एंव लाइफ मैनेजमेंट स्पीकर हैं।