दिग्विजय सिंह दल में और कमलनाथ दिल्ली में मजबूत पकड़ बना रहे हैं - MP NEWS

भोपाल
। कांग्रेस पार्टी के सभी नेताओं ने 2018 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा। सरकार बनी फिर सभी नेता आपस में मिलकर लड़े और सरकार गिर गई। अब 2023 का विधानसभा चुनाव है। सिर्फ दो नेता बचे हैं। दोनों सक्रिय हैं। दिग्विजय सिंह दल में और कमलनाथ दिल्ली में मजबूत पकड़ बना रहे हैं। 

दिग्विजय सिंह रिश्तो को रिचार्ज करने निकले

मध्यप्रदेश में अपनी पहली पारी में शर्मनाक पराजय के बाद दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश की सक्रिय राजनीति छोड़कर दिल्ली चले गए थे। कई राज्यों के प्रभारी रहे परंतु गोवा की विफलता के बाद उन्हें मध्यप्रदेश वापस आना पड़ा। पवित्र नर्मदा की परिक्रमा के साथ ही उन्होंने मध्यप्रदेश में अपनी पुनः प्राण प्रतिष्ठा कर ली। कान-कान वाली राजनीति काम आई और 2018 के विधानसभा चुनाव में अच्छी सफलता मिली लेकिन तब से लेकर अब तक अपने समर्थकों को टिकट दिलाने के मामले में दिग्विजय सिंह कमजोर साबित हुए। एक बार फिर चुनाव से पहले दिग्विजय सिंह पदयात्रा पर निकल गए हैं। 

कमलनाथ को मध्यप्रदेश में फ्यूचर नजर आता है 

कमलनाथ पर लिखी गई हर किताब बताती है कि कांग्रेस पार्टी ने कमलनाथ को ना केवल नाम दिया बल्कि सबसे बड़ा मुकाम भी दिया। पार्टी ने उन्हें छिंदवाड़ा भेजा और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें बाहरी होने के बावजूद चुनाव जिताया। आज पार्टी को कमलनाथ की जरूरत है लेकिन कमलनाथ मध्य प्रदेश छोड़ने को तैयार नहीं है। बयानों में हमेशा कहते हैं कि सोनिया गांधी जो कहेंगे वह स्वीकार है परंतु जैसे ही सोनिया गांधी कुछ कहना चाहती हैं, दिल्ली पहुंच जाते हैं और लौटकर बयान देते हैं कि मध्य प्रदेश नहीं छोडूंगा। वैसे इन दिनों कांग्रेस पार्टी में महत्वपूर्ण फैसले प्रियंका गांधी कर रही हैं और पिछले कुछ दिन कांग्रेस पार्टी में वरिष्ठ नेताओं के लिए अच्छे नहीं रहे।

कांग्रेस पार्टी में सबसे बड़ा सवाल- 2023 में कौन-कौन लड़ेगा 

कांग्रेस पार्टी में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से पहले और टिकट वितरण के बाद कौन-कौन लड़ेगा। यहां प्रश्न यह नहीं है कि चुनाव कौन-कौन लड़ेगा, बल्कि प्रश्न यह है कि गुटबाजी कैसी होगी। जब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया थे, उनके विरोध के नाम पर सभी एकजुट हो जाते थे। अब महाराजा कांग्रेस में नहीं है। लड़ने की आदत पुरानी है। देखना यह है कि कांग्रेस पार्टी के नेता मिलकर भाजपा से चुनाव लड़ेंगे या फिर 2018 से पहले की तरह आपस में लड़ मरेंगे। मध्य प्रदेश की राजनीतिक खबरों के लिए कृपया MP political news पर क्लिक करें.


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