SC-ST सदस्य की संपत्ति पर कब्जा करना कब दण्डनीय अपराध होगा- जानिए SC-ST Act, 1988

अगर कोई दबंग व्यक्ति किसी व्यक्ति की भूमि पर जबरदस्ती कब्जा कर लेता है तो ऐसे दबंग व्यक्ति पर कार्यवाही करने का अधिकार कार्यपालक मजिस्ट्रेट को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 145 के अंतर्गत प्राप्त होता है कि वह कब्जा करने वाले दबंग व्यक्ति को नोटिस भेजे। लेकिन यदि पीड़ित व्यक्ति अनुसूचित जाति व जनजाति का है और उसकी संपत्ति पर कब्जा करने वाला अनुसूचित जाति अथवा जनजाति का नहीं है अब पीड़ित व्यक्ति SDM कोर्ट में न जाकर विशेष विधि के अंतर्गत सीधे FIR दर्ज कर सकता है।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम,1989 की धारा 3(1) (च) एवं 3(1) (छ) की परिभाषा:-

कोई व्यक्ति जो अनुसूचित जाति एवं जनजाति का सदस्य नहीं है, वह ऐसे वर्ग के व्यक्ति की पुरखों की जमीन पर कब्जा करेगा या, किसी प्राधिकारी या शासन द्वारा आवंटित भूमि, मकान, परिसर, खेत पर जबरदस्ती कब्जा करेगा या उनके अधिकार से संबंधित भूमि, जल, परिसर, खेत आदि को उपयोग करने से रोकेगा या हस्तक्षेप करेगा, या उनकी फसलों को नष्ट करने वाला व्यक्ति धारा 3(1) च एवं छ के अंतर्गत दण्डित होगा।

शासन द्वारा राहत राशि
पीड़ित व्यक्ति को राज्य शासन द्वारा 1 लाख रुपए एवं जहां हो तो सरकार अपने खर्चे पर भूमि, परिसर, या जल आपूर्ति सहित सिंचाई सुविधा वापस लौटाई जाएगी। उपर्युक्त राहत राशि का लाभ लेने के लिए जिला कलेक्टर या जिला संयोजक अनुसूचित जाति जनजाति कार्यालय या उपखण्ड मजिस्ट्रेट को FIR दर्ज होने के बाद या तो थाने के थाना प्रभारी द्वारा या स्वयं पीड़ित व्यक्ति द्वारा आवेदन किया जाएगा। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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