घड़ी की सुई उत्तर से दक्षिण क्यों घूमती है जबकि सूर्य पूर्व से पश्चिम जाता है- GK in Hindi

श्री राम निवास प्रजापति ने प्रश्न किया है कि घड़ी की सुई वामावर्त क्यों नहीं घूमती। यानी उत्तर से दक्षिण दिशा की तरफ क्यों घूमती है। दक्षिण से उत्तर दिशा की तरफ क्यों नहीं घूमती। यदि हम सूर्य की ओर देखते हैं तो वह पूर्व दिशा से उदय होता है और पश्चिम दिशा में अस्त हो जाता है। घड़ी की सुई को भी उसके साथ ही चलना चाहिए। आइए पता लगाते हैं कि क्या घड़ी बनाने वाले इंजीनियर ने कोई गलती कर दी थी या फिर इसके पीछे कोई बड़ा लॉजिक भी है।

जब घड़ियां नहीं थी, तब समय का पता कैसे लगाते थे

महात्मा ज्योतिबा फ़ुले रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी साहित्य में ग्रेजुएट दीप चाहल बताते हैं कि प्राचीन काल में समय की गणना के लिए केवल एक ही स्त्रोत (सूर्य) हुआ करता था। हमारे पूर्वज अपनी परछाई के जरिए समय का अनुमान लगाया करते थे। मिस्र के विशेषज्ञों ने परछाई के माध्यम से ही समय का सटीक पता लगाने का तरीका अनुसंधान किया था लेकिन ग्रीक लोगों ने एक रॉड के माध्यम से समय की गणना करने का तरीका खोज निकाला था।

उत्तरी गोलार्ध वालों ने घड़ी बनाई इसलिए

जो लोग उत्तरी गोलार्ध में रहते थे, उन्होंने ही Clockwise System बनाया था। उन लोगों को अपने सनडॉयल में खड़े होने पर सूर्य पश्चिम से पूर्व की ओर जाता प्रतीत होता था। तब से Clockwise System पश्चिम से पूर्व की ओर चल रहा है। यदि दक्षिणी गोलार्ध में रह रहे लोग इसको लेकर पहल करते तो शायद वो पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाला Clockwise System बनाते। और हमारी घड़ियां उल्टी दिशा में घूम रही होतीं।

घड़ी की सुई दक्षिणावर्त क्यों घूमती है वामावर्त क्यों नहीं 

यहां दक्षिणावर्त से तात्पर्य उत्तर दिशा से पूर्व होते हुए दक्षिण दिशा की ओर जाना और वामावर्त का तात्पर्य है दक्षिण दिशा से पश्चिम होते हुए उत्तर दिशा की ओर जाना। घड़ी की सुई दक्षिणावर्त घूमती है। यानी उत्तर दिशा से शुरू होती है और पूर्व होते हुए दक्षिण दिशा तक पहुंचती है। फिर पश्चिम होते हुए वापस उत्तर दिशा में आ जाती है। इस प्रकार उसका एक चक्र पूरा होता है। दरअसल इसके पीछे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण भी हैं:- 

समय की सबसे पहली तस्वीर कैसी थी

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि जब बिगबैंग हुआ और हमारे सौरमंडल का निर्माण हुआ। उस समय धूल और धुएं के कण, तारे और सौर मंडल के तमाम ग्रह दक्षिणावर्त घूम रहे थे। आज भी हमारा सौरमंडल दक्षिणावर्त परिक्रमा करता है। पृथ्वी भी अपनी धुरी पर दक्षिणावर्त में घूमती है। यही कारण है कि घड़ी की सुई दक्षिणावर्त परिक्रमा के लिए निर्धारित की गई। 

स्पेशल नोट:- सूर्य ना तो पूर्व से उदय होता है और ना ही पश्चिम में अस्त होता है। सूर्य अपने स्थान पर स्थिर रहता है। पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते हुए सूर्य की परिक्रमा करती है। पृथ्वी 24 घंटे में अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करती है। इसी कारण हमें सूर्य पूर्व से उदय होता हुआ और पश्चिम में अस्त होता हुआ दिखाई देता है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा 365 दिन में पूरा करती है। इसलिए 1 साल में 365 दिन होते हैं। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article

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