GWALIOR NEWS- बाढ़ पीड़ितों को सांसद ने फटे पुराने कपड़े और जूते दिए

भोपाल
। ग्वालियर के सांसद विवेक नारायण शेजवलकर भितरवार विधानसभा में बाढ़ पीड़ितों को फटे पुराने कपड़े और जूते-चप्पल बांट आए। आज ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे और सांसद शेजवलकर की दया को लौटा दिया। अब मामला संभालने के लिए कहा जा रहा है कि प्रशासन ने सांसद के हाथ से यह गड़बड़ी करवा दी है। मामला नजरपुर गांव का है। 

हम भिखारी नहीं, बाढ़ पीड़ित हैं: ग्रामीणों ने कहा

लोगों ने दफ्तर का घेराव करके कहा- हम भिखारी नहीं है। बाढ़ में हमारी गृहस्थी और मेहनत की पूरी कमाई बह गई है। सरकार या अफसर मदद नहीं कर सकते तो न करें, लेकिन झूठी उम्मीद बंधाकर इस तरह मजाक तो न उड़ाए। इस तरह की हरकत से लोगों में आक्रोश है। ग्वालियर-चंबल अंचल में 1 व 2 अगस्त को भीषण बाढ़ आई थी। इसमें ग्वालियर जिले के डबरा-भितरवार के इलाकों के करीब 46 गांव के हजारों लोग बेघर हो गए थे। 2500 से ज्यादा मकान टूट गए या बह गए थे। यह मकान अब किसी लायक नहीं बचे हैं। लोगों का पैसा, गहने, गृहस्थी का सामान व मवेशी तक बह गए थे। हालत यह है कि कई गांव में लोगों के पास पहनने के लिए दूसरी जोड़ी कपड़े तक नहीं हैं।

नए कपड़े दिखा कर फोटो खिंचवाए, ग​ठरियों में उतरन निकली 

24 अगस्त को ग्वालियर सांसद विवेक नारायण शेजवलकर भितरवार के बाढ़ प्रभावित गांव नजरपुर में पहुंचे थे। यहां उन्होंने गांव की महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को कपड़े और जूते चप्पल भेंट किए थे। जो सामान उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से दिए और फोटो खिंचवाए, वह तो अच्छे थे, लेकिन गांव के लोगों ने जब उनके जाने के बाद गठरी खोली तो वह फटे-पुराने कपड़े, जूते, चप्पल देखकर हैरान रह गए।

ग्रामीणों ने SDM के ऑफिस में कपड़े और जूते फेंक दिए

नजरपुर गांव के लोगों ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे इस मामले में हंगामा शुरू कर दिया है। पीड़ितों ने भितरवार SDM अश्वनी कुमार के दफ्तर पहुंचकर कपड़े और जूते फेंक दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह NGO के द्वारा भेजे गए कपड़े और जूते हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि आपको तो देखकर वितरित करना चाहिए। दोपहर 3 बजे तक हंगामा जारी था।

लोगों ने कहा: झूठी उम्मीद न बंधाओ, तकलीफ होती है

नजरपुर गांव की ममता देवी ने कहा कि बाढ़ में सब कुछ बह गया। अब कुछ नहीं बचा है। तीन दिन पहले यह राहत सामग्री बांटी गई थी, जिसमें फटे कपड़े व जूते हैं। सामान भले ही मत बांटो, लेकिन गरीब को झूठी उम्मीद तो मत बंधाओ। हमारा मजाक मत उड़ाओ। मुन्नीबाई ने कहा कि फटे, कपड़ा, जूता बांट गए हैं। प्रशासन और सरकार हमसे ऐसा व्यवहार करेगा पता नहीं था। प्रकृति ने हमे सताया है और नेता और अफसर मजाक उड़ा रहे हैं। ऐसा न करो गरीब का मजाब मत बनाओ।

प्राकृतिक आपदा में राहत नागरिकों का अधिकार और सरकार की जिम्मेदारी है 

ज्यादातर लोगों को नहीं पता और इसी बात का प्रशासनिक अधिकारी एवं नेता फायदा उठाते हैं। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राहत एवं मुआवजा प्राप्त करना पीड़ित नागरिकों का संवैधानिक अधिकार एवं सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसे ही हालातों के लिए लोकतंत्र की परिकल्पना की गई। जब विषम परिस्थितियों में नागरिकों को भगवान भरोसे ना छोड़ा जाए। यदि कोई मुआवजा देने से मना करता है तो वह संविधान का अपमान करता है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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