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यदि कोई कोर्ट द्वारा लगाया गया जुर्माना नहीं भरे तब क्या कानूनी कार्रवाई होगी - LEARN IPC SECTION 64

पिछले लेख की धारा 63 में हमने आपको बताया था कि कोई भी अपराधी पर न्यायालय किस धारा के अंतर्गत जुर्माना लगता है, अगर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तब उसकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए जुर्माना लगा दिया जाता है। अगर कोई अपराधी न्यायालय द्वारा लगाए गए जुर्माने का भुगतान नहीं करता है तब उस पर किस धारा के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी। 

इसकी परिभाषा भारतीय दंड संहिता की धारा 64 में दी गई है। इस धारा के अनुसार बताया गया है कि अगर कोई व्यक्ति जिसको कारावास या जुर्माने से, या केवल जुर्माने से, या जुर्माना अथवा कारावास से दाण्डित किया गया है और वह जुर्माने का भुकतान नहीं करता है तब यह अपराध इस धारा के अंतर्गत परिभाषित होगा।

लेकिन यहां पर न्यायाधीश कौन सी सजा देगा इस धारा में स्पष्ट नहीं है। इसके लिए दण्ड संहिता की धारा 65 से 67 में जुर्माने का भुगतान में डिफॉल्ट की दशा में न्यायालय विकल्प के रूप में कितनी अवधि तक कि कारावास की सजा अधिरोपित कर सकता है, इस संबंध में नियमो का उल्लेख है। भारतीय दंड संहिता की धारा 64 में अपराधी भुगतान में डिफॉल्टर होने की परिभाषा को ही बताया है।

उधरणानुसार वाद:-शांतिलाल बनाम मध्यप्रदेश राज्य - 

उच्चतम न्यायालय ने विनिशिचत किया कि जुर्माना देने में डिफॉल्ट किया जाने पर जो कारावास की सजा दी जाती है, वह वास्तव में दण्ड नहीं होता है अपितु जुर्माने का भुगतान न किया जाने पर आरोपी को उपगत (स्वीकार)  होता है। दण्ड से अभिप्राय ऐसी सजा से है जो न्यायालय के आदेशानुसार आरोपी को भुगतान अनिवार्य होता जब तक कि उसे न्यायालय द्वारा पूर्णतः माफ नहीं कर दिया जाता लेकिन धारा 64 के अधीन अभियुक्त को मिली कारावास की अवधि के लिए इसलिए दण्डादिष्ट किया जाता हैं,क्योंकि वह या तो जुर्माने की राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहा है या उसने जुर्माना अदा करने से इन्कार किया है। इसलिए धारा 63 में बताया गया है कि न्यायालय का यह कर्तव्य है कि यह आरोपी की आर्थिक क्षमता एवं अन्य सुसंगत तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जुर्माना लगाए। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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