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वेक्सीन, वितरण, व्यवस्था और सदाशय - Pratidin

देश की अन्य सरकारों की भांति नहीं,बल्कि उनसे कुछ आगे बढकर कोरोना वेक्सीन वितरण में कुछ करने का दावा मध्यप्रदेश सरकार ने किया है | उसका उद्देश्य सफल हो, मध्यप्रदेश में १.२ करोड़ कोरोना वेक्सीन के डोज आ रहे हैं | प्रदेश सरकार ने वेक्सीन पहुंचने के चार घंटे के भीतर उसे लगाने के लिया कोल्ड चेन बनाई है |भोपाल, ग्वालियर,इंदौर और जबलपुर और कुछ संभाग स्तर पर यह चेन काम करेगी | मध्यप्रदेश सहित आनी राज्य और केंद्र सरकार अपने उद्देशय में सफल  हो सारा देश इस दुष्काल से ऊब चुका है |

वैसे यह केंद्र सरकार की सार्थक पहल ही कही जायेगी कि किसी वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की अनुमति मिलने से पहले ही देश के विभिन्न भागों में इसे लगाने की तैयारी का पूर्वाभ्यास किया गया। निस्संदेह जब देश वैक्सीनेशन अभियान के करीब पहुंच ही गया है तो सघन आबादी वाले विशाल देश में इस अभियान से जुड़े तमाम पहलुओं का आकलन जरूरी हो जाता है। अच्छी बात है कि देश में कोरोना संक्रमण का ग्राफ लगातार गिर रहा है और मृत्यु दर में कमी आई है। लेकिन चूक की किसी भी गुंजाइश को नहीं स्वीकारा जा सकता। वह भी ऐसे वक्त में जब कोरोना वायरस ने रूप बदलकर ब्रिटेन व अन्य यूरोपीय देशों को फिर से भयभीत किया है।

वैसे , वैक्सीन लगाने का पूर्वाभ्यास और उससे जुड़ी तैयारियों की निगरानी अच्छी पहल है, जिसके तहत देश के चार राज्यों के आठ जिलों में वैक्सीन लगाने की तैयारी का अभ्यास किया गया। निस्संदेह, इस दौरान जो खामियां नजर आएंगी, उनके निराकरण से आने वाले समय में टीकाकरण अभियान को सुचारु रूप से चलाने में मदद मिलेगी। भौगोलिक विविधताओं व भिन्न जनसंख्या घनत्व वाले देश में टीकाकरण अभियान बेहतर ढंग से चलाना बड़ी चुनौती है। यह सुखद है कि अभियान के लिये उत्तर से पंजाब, पूर्व से असम, दक्षिण से आंध्र तथा पश्चिम भारत से गुजरात के दो-दो जिलों का चयन किया गया है।

यूं तो भारत ने पोलियो समेत कई टीकाकरण अभियानों को सफलतापूर्वक चलाया है और इसके लिये कारगर तंत्र विकसित किया है, लेकिन एक शताब्दी के बाद आयी कोरोना जैसी महामारी एक नयी चुनौती है, जिसके लिये एक कारगर तंत्र बेहद जरूरी है, जबकि देश का सार्वजनिक चिकित्सा तंत्र खस्ताहाल में है, जिसकी बानगी कोरोना से लड़ाई के दौरान सामने आई। निस्संदेह, यह करोड़ों जिंदगियां बचाने का प्रश्न भी है। वैक्सीन के अनुकूल वातावरण-तापमान उपलब्ध कराने के साथ ही उसका न्यायसंगत वितरण भी जरूरी है।

 

वैसे इस अभियान को तार्किक परिणति तक पहुंचाने हेतु चिकित्सा-पुलिस विभाग के साथ ही जिला प्रशासन व कई अन्य विभागों से बेहतर तालमेल जरूरी है, जिसमें फ्रंट लाइन वर्कर्स के अलावा नागरिकों का सहयोग भी जरूरी होगा। टीकाकरण में कौन-सी बाधाएं आ सकती हैं और उनसे कैसे निपटा जायेगा, इसका अभ्यास जरूरी था। खासकर देश के पिछड़े इलाकों में जहां चिकित्सा तंत्र कमजोर है वहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसमें वैक्सीन के अनुकूल तापमान में भंडारण की अपरिहार्य शर्त भी शामिल है। जिसके लिये पर्याप्त प्रशिक्षण वैक्सीन संग्रहण करने व लगाने वाले लोगों को दिया जाना भी जरूरी है ताकि जब वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी मिले तो तुरंत लोगों को इसका लाभ मिल सके।

अब तो राज्य सरकारों की भी सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जैसा कि कहा जा रहा है कि पहले चरण में तीस करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जायेगी, जिसमें तीन करोड़ सुरक्षाकर्मी तथा स्वास्थ्यकर्मी व कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बीमार तथा पचास वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति के शामिल होंगे। लेकिन इस अभियान से जुड़े भ्रमों को भी दूर करना होगा क्योंकि कई राज्य मुफ्त में वैक्सीन देने की बात कर रहे हैं। इस बीच चिंता की बात यह है कि ब्रिटेन में सामने आया वायरस का नया स्ट्रैन भारत में दस्तक दे चुका है।

तंत्र की चूक से ब्रिटेन से भारत आये छह लोगों में नये संक्रमण के वाहक वायरस पाये गये हैं। एक बार हम फिर चूके हैं। ब्रिटेन में कोरोना वायरस के नये वैरियंट मिलने को हमने गंभीरता से नहीं लिया। नये स्ट्रैन के अधिक संक्रामक होने के बाद हमें ब्रिटेन व यूरोप से आने वाले लोगों को लेकर अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए थी। एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन से नवंबर और दिसंबर के बीच कोई तैंतीस हजार लोग भारत आये, जिनमें सौ से अधिक लोग कोरोना संक्रमित पाये गये। नये स्ट्रैन से संक्रमित लोगों को अलग रखा गया है और उनके संपर्क में आये लोगों को क्वारंटीन किया गया है। ऐसे लोगों को पहले ही ट्रैक किया जाना चाहिए था। 
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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