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MPPSC जिसे निष्पक्ष परीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी, उसने खुद कभी कोई परीक्षा नहीं दी - HINDI NEWS

इंदौर
। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के प्रभारी चेयरमैन प्रोफेसर राजेशलाल मेहरा की नियुक्ति पर बड़ा विवाद हो गया है। जिस व्यक्ति को मध्य प्रदेश शासन के लिए योग्य उम्मीदवारों की परीक्षा लेने की जिम्मेदारी दी गई है उस व्यक्ति की खुद की नियुक्ति विवादों के घेरे में है। प्रोफेसर पद पर उसकी नियुक्ति किसी भी परीक्षा के माध्यम से नहीं हुई बल्कि एक विवादित इंटरव्यू के दौरान उन्हें सरकारी नौकरी मिली। मुख्यमंत्री के कार्यालय में प्राप्त शिकायत के बाद सामान्य प्रशासन विभाग में एक नई समिति का गठन किया है जिसमें सीएम शिवराज सिंह चौहान चेयरमैन बनाए गए हैं। 

पिछले दिनों मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के चेयरमैन एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति के लिए मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग में एक समिति का गठन किया था इस समिति के चेयरमैन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान है जबकि सदस्यों में आदिम जाति कल्याण मंत्री मीना सिंह मांडवे और स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार शामिल किए गए हैं। बताया जा रहा है कि पीएससी के प्रभारी चेयरमैन प्रोफेसर मेहरा की नियुक्ति पर विवाद के कारण ही समिति का गठन किया गया है।

एमपीपीएससी में चेयरमैन की नियुक्ति का विवाद क्या है

जून में पहले ही शासन ने पीएससी में सदस्य और अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए समिति गठित कर दी थी। अब पुरानी समिति में फेरबदल कर यह पीएससी के लिए तीन सदस्यीय नई समिति गठित की गई है। पीएससी के पूर्व चेयरमैन डॉ. भास्कर चौबे दिसंबर में रिटायर हो गए थे। एक जनवरी को प्रो.मेहरा को प्रभारी अध्यक्ष बना दिया गया था। पीएससी में वरिष्ठ सदस्य होने के नाते मेहरा को आयोग की कमान सौंपी गई थी। इस बीचे बीते दिनों मुख्यमंत्री कार्यालय में एक शिकायत पहुंची है। शिकायत में मेहरा को पीएससी की कमान देने पर आपत्ति ली गई है। शिकायत में आपत्ति के लिए मेहरा के प्रोफेसर के तौर पर चयन और नियुक्ति को वजह बताया गया है।

राजेश लाल मेहरा की प्रोफ़ेसर पद पर नियुक्ति विवादित है, चेयरमैन कैसे बना सकते हैं

उल्लेखनीय है कि पीएससी ने ही 2011 में प्रदेश के कॉलेजों के लिए सीधे प्रोफेसरों की भर्ती की थी। इसके लिए कोई परीक्षा नहीं लेते हुए सीधे इंटरव्यू के आधार पर प्रोफेसरों का चयन कर लिया गया था। उसी चयन प्रक्रिया में मेहरा को प्रोफेसर चुना गया था। नियुक्ति के बाद प्रोबेशन पूरा होते-होते मेहरा को पीएससी में सदस्य भी नियुक्त कर दिया गया था। 

प्रो. राजेशलाल मेहरा की सीएम कार्यालय में शिकायत

सीएम कार्यालय भेजी गई शिकायत में यही आरोप लगाया गया है कि जिस व्यक्ति की मूल नियुक्ति पर ही विवाद हो उसे पहले पीएससी का सदस्य बनाना और फिर अध्यक्ष बनाना उचित नहीं है। माना जा रहा है कि प्रभारी अध्यक्ष के नाते मेहरा नियमित अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे हैं।

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