मध्यप्रदेश के दो दिग्गजों की प्रतिष्ठा का प्रश्न, कानून को अपना काम करने देंगे या नहीं - MP NEWS

Updesh Awasthee
भोपाल
। मध्य प्रदेश कैश कांड 2019 मामले पर देश भर की मीडिया एवं भाजपा विरोधियों की नजर बनी हुई है। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा था कि प्रदेश में कानून का राज है। सबके खिलाफ कार्रवाई होगी। अब कार्यवाही का वक्त आ गया है। लोग देखना चाहते हैं कि कानून अपना काम करता है या कानून के काम में अड़ंगे लगाए जाएंगे।

दिग्विजय सिंह सहित कई कांग्रेस विधायकों के नाम 

मामला लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मध्य प्रदेश में हुए अवैध धन परिवहन का है। कहा जा रहा है कि प्रदेशभर से अवैध वसूली करके चुनाव में खर्च करने के लिए कांग्रेस विधायकों को पैसा भेजा गया था। धन प्राप्त करने वालों में भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव हारे कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का नाम भी है। दिग्विजय सिंह हमेशा कहते रहे कि यदि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की एक भी शिकायत आती है तो उसकी जांच करें और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करें। देखना यह है कि क्या इस मामले में भी राधौगढ़ के राजा ठाकुर दिग्विजय सिंह के शब्द वही रहते हैं या नहीं। जिस समय यह कांड हुआ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ थे। हालांकि, रिपोर्ट में कमलनाथ पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है।

चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव से पूछा है: मामले में क्या कार्रवाई की

4 जनवरी को चुनाव आयोग, एमपी के मुख्य सचिव और गृह सचिव की मीटिंग है। चुनाव आयोग ने राज्य के इन दो अफसरों को समन भेजकर कहा है कि वे बताए कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है। उल्लेखनीय है कि कमलनाथ के विश्वास पात्रों के ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापा मार कार्रवाई की थी। इस दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने एक रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपी थी। चुनाव आयोग ने इस मामले को कानूनी कार्रवाई के लिए मध्य प्रदेश शासन के पास भेजा है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की निष्पक्षता और ईमानदारी की परीक्षा 

यह मामला ज्योतिरादित्य सिंधिया की निष्पक्षता और ईमानदारी की परीक्षा भी है, क्योंकि इस मामले में उनके कुछ वफादार विधायकों के नाम भी हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया हमेशा कहते हैं कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीति करते हैं। देखना यह है कि भ्रष्टाचार और money-laundering के मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया कानून को अपना काम करने देते हैं या नहीं।

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