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INDORE दवे परिवार के पास 10 करोड़ की प्रॉपर्टी, कलेक्टर ने रासुका के आदेश जारी किए - MP NEWS

इंदौर।
मध्य प्रदेश की सरकारी उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से गरीबों को वितरित होने वाले अनाज की कालाबाजारी के मामले में जांच के दौरान नया खुलासा हुआ है। पता चला है कि दवे परिवार के 12 सदस्य किसी काम में लगे हुए हैं। या तो सहकारी उपभंडार में पदाधिकारी हैं या फिर उचित मूल्य की दुकान में विक्रेता। घर की सभी महिलाएं और पुरुष शामिल है। इसका पता चलते ही इंदौर कलेक्टर ने भरत दवे एवं श्याम दवे के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही करने के आदेश जारी कर दिए।

दवे परिवार की जांच में अब तक क्या-क्या मिला

प्रशासन द्वारा कराई गई संपत्तियों की जांच में कलेक्टोरेट के आसपास ही इनकी पांच मल्टियां और एक प्लॉट सामने आ चुका है, जिसकी कीमत पांच करोड़ के करीब बताई जा रही है। यह मल्टियां श्याम दवे की हैं और यहां पर किराए से दुकानें संचालित हो रही हैं तो कहीं पर किराएदार रह रहे हैं। वहीं इसी परिवार के एक सदस्य धर्मेंद्र पुरोहित की पीर गली के पास तीन मल्टियां होना बताया जा रहा है। भरत दवे के एक रिश्तेदार अशोक और उसकी पत्नी अंजू द्वारा बिसनावदा में ईंट-भट्टे का भी लंबा-चौड़ा कारोबार होना बताया जा रहा है। हालांकि भरत दवे के अभी केवल सुदामानगर में एक मकान का ही पता चला है।

दवे परिवार के सदस्य कहां किस पद पर

परिवार में कुल पांच भाई भरत, श्याम, अनिल, अशोक और नरेंद्र दवे
नरेंद्र दवे- अभिनय श्री महिला सहकारी भंडार में इसकी पत्नी विजया उपाध्यक्ष।
अशोक दवे- श्री मां बिजासन प्राथमिक भंडार में इसका बेटा अमित दवे विक्रेता।
अनिल दवे- अभिनय श्री महिला सहकारी उपभंडार में इसकी पत्नी कांतादेवी अध्यक्ष।
श्याम दवे- इसका बेटा धीतेश दवे छात्र सहकारिता उपभंडार में विक्रेता। साला धर्मेंद्र श्री मां बिजासन प्राथमिक सहकारिता उपभंडार में अध्यक्ष। भांजा राजेश पालीवाल अभिनय श्री महिला सहकारी उपभंडार में विक्रेता।
भरत दवे -भाइयों को राशन दुकानों में लिंक किया। पत्नी भारती देवी की खाद्य फैक्टरी पर पहले ही छापा डल चुका और इसमें एफआईआर दर्ज हो चुकी।

8000 रुपए की कमाई को 40000 रुपए का धंधा कैसे बनाते हैं

उचित मूल्य की सरकारी दुकान संचालित करने के लिए शासन द्वारा हर दुकान संचालक को प्रति क्विंटल अनाज वितरण के लिए 70 रुपए का कमीशन दिया जाता है। एक दुकान द्वारा हर माह औसतन 120 क्विंटल अनाज का वितरण किया जाता है, यानी हर दुकानदार को औसतन आठ से नौ हजार रुपए के बीच की कमाई होती है। राशन माफिया ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए इस अनाज को चुराकर बाजार में बेचने का धंधा शुरू कर दिया। घोटाले की जांच में सामने आया है कि औसतन हर दुकान से करीब 20 क्विंटल अनाज यानी आवंटित अनाज का करीब 15 से 20 फीसदी डायवर्ट कर बाजारों में बेचा गया है, जिसकी औसत कीमत 40 से 50 हजार रुपए प्रति माह होती है। इस तरह राशन माफिया ने हर माह इन दुकानों से हजारों रुपए का घोटाला किया।

इंदौर कलेक्टर का बयान

सभी 31 आरोपियों की संपत्ति की जांच अधिकारियों द्वारा की जा रही है। सभी दुकानों की मॉनिटरिंग एसडीएम द्वारा होगी और बाउंडओवर कराया जाएगा, जिससे कोई भी भविष्य में गरीबों के अनाज में घोटाला करने की सोचे भी नहीं।
- मनीष सिंह, कलेक्टर



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