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मध्यप्रदेश में बीमार कर्मचारियों को वीआरएस देने की तैयारी, इस बार फार्मूला 20:50 सख्ती से लागू - MP NEWS

भोपाल
। मध्य प्रदेश के सरकारी खजाने पर बोझ कम करने के लिए शिवराज सिंह सरकार ने बीमार कर्मचारियों को रिटायर करने का फैसला किया है। 20 साल की सेवा या 50 साल आयु वर्ग वाले कर्मचारियों को रिटायर कर दिया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों से लिस्ट बनाने के लिए कहा है। लिस्ट में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ यदि लापरवाही या भ्रष्टाचार के लिए कोई विभागीय कार्यवाही हुई होगी, तो ऐसे कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करना आसान होगा इसलिए कर्मचारियों के रिकॉर्ड भी तलाशी जा रहे हैं। 

इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कह चुके हैं कि परफॉर्मेंस के आधार पर ही अधिकारियों व कर्मचारियों की फील्ड पोस्टिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री 7 दिसंबर को कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इससे पहले सामान्य प्रशासन विभाग ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों की जानकारी जुटा रहा है, जो इस नियम के तहत कार्य करने में फिट नही हैं। इस प्रक्रिया में उन कर्मचारियों को भी बाहर निकाल दिया जाएगा जो भले ही फिजिकली फिट हो परंतु उन्होंने मेडिकल के नाम पर छुट्टियां मनाई होंगी।

CR गणना करने का नियम
इस नियम के अनुसार गणना करने के लिए अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं।
क श्रेणी के 5 नंबर, 
ख श्रेणी के 4 नंबर, 
ग श्रेणी के 3 नंबर और 
घ श्रेणी के 2 नंबर मिलेंगे। 
यदि किसी कर्मचारी को हर साल 'क' श्रेणी के नंबर मिलते हैं तो 20 साल की सेवा में उसके 100 नंबर हो जाएंगे, यानी कि आगे की उसकी नौकरी पूरी तरह सुरक्षित है। वहीं ग और घ श्रेणी वालों के लिए संकट है।

क्या है 20:50 फार्मूला
केंद्र और राज्य सरकार ने नियम बनाया है कि जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की सर्विस 20 साल पूरी हो गई है या फिर उम्र 50 साल के पार हो गई है। उनके सर्विस रिकार्ड (सीआर) की जांच की जाएगी। यदि उनका परफार्मेंस मापदंडों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो उन्हें वीआरएस दे दिया जाएगा। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि वह मेडिकली फिट है या नहीं।

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