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कर्मचारी को 2011 के समयमान आदेश पर 2018 में वसूली को हाईकोर्ट का स्टे / EMPLOYEE NEWS

जबलपुर। श्री मोहन सिंह ठाकुर, सहायक ग्रेड-2 के पद पर सहायक संचालक, कार्यालय, हार्टिकल्चर, सिलारी पिपरिया, जिला होशंगाबाद में कार्यरत हैं। उन्हें दिनाँक दिनाँक 01/04/2006 से 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर, आदेश दिनाँक 27/08/10 के द्वारा प्रथम समयमान वेतन 5200-20,200(2400 ग्रेड) दिया गया था। कई वर्षों तक, लाभ प्राप्त करने के बाद दिनाँक   06/06/2018 के द्वारा पूर्व प्रदत्त समयमान की तारीख़ परिवर्तित कर 01/07/2011 कर पुनर्निधारण आदेशित किया। जिसके परिणामस्वरूप लगभग 370983 रुपये की वसूली कर्मचारी के विरुद्ध उत्पन्न हुई। लगभग 6000 रुपये, कर्मचारी के वेतन से हर माह वसूले जा रहे थे।  समयमान वेतनमान डेट परिवर्तन करने वाले आदेश को सम्बन्धित लिपिक द्वारा हाई कोर्ट जबलपुर में चुनौती दी गई थी।

कर्मचारी के वकील श्री अमित चतुर्वेदी, उच्च न्यायालय, जबलपुर के अनुसार, कर्मचारी को प्रथम समयमान नियमानुसार दिया गया था। उक्त परिस्थिति में, कई वर्षो बाद कथित आपत्ति के बाद, समयमान प्रदाय की तिथि को परिवर्तित करना, विधि के अनुरुप नही है। बेचारा कर्मचारी अनभिज्ञ है कि  कौन सा लाभ उसे ग़लत मिला या किन कारणों से वसूली एवम पुनर्निर्धारण आदेश किया गया है। 

विभाग की आपत्ति की वर्ष 2018 का आदेश 2020 में चुनौती दिया गया है, इस आधार पर कोर्ट द्वारा दरकिनार कर दिया गया है कि हर महीने लगभग 6000 रुपये कर्मचारी के वेतन से वसूले जा रहे हैं। यह 74 किस्तों में होना है। 50 से ज्यादा क़िस्त अभी भी शेष हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी विपरीत वसूली को स्टे करना जरूरी है, जो कि स्थापित विधि के विरुद्ध है। उपरोक्त कारणों के आधार पर हाईकोर्ट ने वसूली को स्टे कर दिया है।

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