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मंदिरों में भगवान को कब तक क्वारंटीन रखोगे, जनता पूछती है / GWALIOR NEWS

ग्वालियर। दूसरों का संकट हरने वाले भगवान ही इन दिनों संकट में हैं और प्रशासन के आदेश पर मंदिरों में बंद रहकर क्वारेंटाइन हैं। भक्त और भगवान के बीच पिछले 2 माह से ज्यादा से दूरी बनी हुई हैं। कोरोना महामारी से बचाने के लिए धार्मिक स्थलों के पट से लेकर दुकानों के शटर तक डाउन कराए गए।

प्रशासन ने 2 माह बाद दुकानों के शटर तो खुलवा दिए हैं और खाने-पीने की चीजों से लेकर हर जरूरत का सामान बिक रहा है लेकिन भक्त और भगवान के बीच दूरी आज भी बनी हुई है। कोरोना पीडि़त को भले ही 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन किया जाता हो लेकिन भगवान को धार्मिक स्थलों में अब तक क्वारेंटाइन कर रखा है।

प्रशासन द्वारा सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक बाजारों को खुलने की अनुमति दी गई है और इस भीषण गर्मी में भी खरीदारी करने के लिए लोग घर से बाहर निकल रहे हैं, लेकिन मंदिरों के पट बंद रहने से भक्तों को परेशान होना पड़ रहा है। त्योहारों पर भगवान और भक्त के बीच दूरी बनी हुई है। इस नौतपा में सैकड़ों भक्त मंदिरों में पहुंचकर मटकी, सतुए और खरबूजे का दान कर भगवान को स्नान कराते हैं लेकिन मंदिर बंद रहने से बाहर से ही दर्शन कर लौटना पड़ रहा है। यह हाल मंदिरों का ही नहीं सभी धार्मिक स्थलों का है। गुरुद्वारे में अरदास करने के लिए भक्त गुरुद्वारे खुलने का इंतजार कर रहे हैं तो वहीं ईद के पर्व पर नमाज घर में रहकर अदा करना पड़ी। मस्जिदों में होने वाली पांचों वक्त की नमाज नहीं हो पा रही है तो गिरजाघरों में प्रार्थना के लिए क्रिश्चियन समाज के लोग चर्च खुलने का इंतजार कर रहे हैं।

अचलेश्वर महादेव मंदिर के जनसम्पर्क अधिकारी वैभव सिंघल का कहना है कि भक्त और भगवान के बीच अब दूरी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन ने जब सभी चीजों को चालू करा दिया है तो मंदिरों के पट क्यों बंद हैं। जो भी नियम हैं उसका पालन मंदिर प्रबंधन करेगा। साईं बाबा मंदिर के पदाधिकारी आनंद सावंत का कहना है कि प्रशासन मंदिरों के लिए गाइड लाइन तैयार करे इस पर अमल किया जाएगा और मंदिर को सैनेटाइज समय-समय पर कराने के साथ-साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे लेकिन अब मंदिर रखना उचित नहीं है। मुस्लिम समाज के सन्नी पठान का कहना है कि मस्जिदों में ताले लटके हैं जिससे नमाज घर पर अदा करनी पड़ रही है। जब सभी दुकानें खुल गई हैं तो फिर मस्जिदें भी खुलनी चाहिए। 

सरदार त्रिलोक सिंह भाटिया का कहना है कि गुरुद्वार कमेटी पूरे लॉकडाउन तक नियमों का पालन करते आई है और गरीब व असहायों की सेवा कर रही है, लेकिन अब गुरुद्वारे बंद रखना उचित नहीं है। भले ही एक टाइम टेबल बनाया जाए, लेकिन कुछ समय के लिए तो खुलना चाहिए। फालका बाजार चर्च के फादर विंसेंट सोरस का कहना है कि अब तक जो भी आयोजन हुए हैं वह घर में ही रहकर किए गए हैं। 31 मई को भी प्रार्थना घर में रहकर करने की अपील की गई है, लेकिन अब प्रार्थना सभा के लिए चर्च खुलने चाहिए।

यह बरतनी होंगी सावधानियां

मंदिर अगर खुलते हैं तो कोरोना से बचाने के लिए कई नियम अपनाने होंगे, जैसे भक्तों को सोशल डिस्टेसिंग का पालन कराना होगा। बिना मास्क के कोई भी धार्मिक स्थलों में प्रवेश न करे। समय-समय पर सेनेटाइज भी कराना जरूरी रहेगा।


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