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भाजपा के ‘बद्री’ और कांग्रेस के ‘भेरू’ | EDITORIAL by Rakesh Dubey

भोपाल। राजनीति जी हाँ मध्यप्रदेश की राजनीति को क्या हो गया है? इन दिनों “बोल वचनों” की जो प्रतियोगिता चल रही है | इस बोल वचन प्रतियोगिता में न तो अपने देखे जा रहे और न गैर। ऐसा लगने लगा है कि दोनों दलों शीर्ष नेतृत्व अपनी धाक खो चुका है। भाजपा की अपने कार्यकर्ताओं पर पकड़ ढीली दिख्र रही तो कांग्रेस में मंत्रियों को कोई संभाल नहीं पा रहा है। मालवा में एक कहावत “बड ले बद्री भेरू आया” भाजपा के सन्दर्भ में बद्री ने भेरू [ भाजपा] की हवा निकाल दी,  तो कांग्रेस के कुछ मंत्री भेरू बने हुए है और अपने कार्यकर्ताओं को कहावत के बद्री की तरह हकाल रहे हैं।

राजगढ़ के हंगामे के ताजा हाल ये हैं कि पुलिस अधीक्षक अपने ही कलेक्टर के खिलाफ FIR दर्ज करने का भाजपा का आवेदन लिए घूम रहे हैं, पूर्व मंत्री बद्री लाल यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है। राजगढ़ जिला मुख्यालय पर कार्यरत जिलाध्यक्ष कार्यालय के कर्मचारी हड़ताल पर रहे एनी सरकारी कर्मचारी काली पट्टी लगाये हुए ज्ञापन देने के बाद काम पर लौटे। जिले के लोग पूर्व मंत्री बद्रीलाल यादव और नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणियों को अपमानजनक मान रहे हैं। दूसरी ओर मध्यप्रदेश शासन के मंत्रियों के व्यवहार पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि कांग्रेस सरकार के मंत्री सत्ता के नशे में चूर हो गए हैं। जीतू पटवारी और पीसी शर्मा मंत्री बनने लायक नहीं हैं।

इस सब में मजे की बात यह है कि मंच से कुछ भी कहने वाले पूर्व मंत्री से न तो भाजपा ने कुछ पूछा है और न कांग्रेस ने वर्तमान मंत्रियों से। दोनों दलों  प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। उनके लोग उनकी नहीं सुन रहे हैं या प्रदेश नेतृत्व इन मामलों में बौने साबित हो रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में किस पराक्र की संस्कृति विकसित हो रही है एक प्रश्न।

नया विवाद भाजपा के ब्यावरा में हुए प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री बद्रीलाल यादव के बयान को लेकर शुरू हुआ। यादव ने मंच से ही संबोधन में राजगढ़ की महिला कलेक्टर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का समर्थन करने और भाजपा कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसी दौरान उन्होंने एक आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। कुछ ही समय में यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा को निशाने पर ले लिया है। इसे ही लेकर जिले कर्मचारी भाजपा के खिलाफ हो गये है और काली पट्टी लगाये घूम रहे हैं। अपने पूर्व मंत्री के बचाव में भाजपा अजीब तर्क दे रही है, मंच पर बड़े नेताओं के आने के पूर्व यादव ने यह टिप्पणी की थी।२४ घंटे बाद यह बचाव या शाबाशी क्या प्रदर्शित करती है। यादव जनसंघ से भाजपा में आये हुए नेता है। भाजपा के संस्कार प्रदायक संघ से जुड़े होने के बारे में विरोधाभासी बातें सामने आई हैं। 

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की टिप्पणी पर भी आपत्ति आईं हैं| कांग्रेस का दावा है कि गोपाल भार्गव  ने मंच से कहा कि “कलेक्टर ने जिस तरह से कार्यकर्ताओं को थप्पड़ मारे और लाठी चलवाई। इससे साबित होता है कि उसके अंदर गर्मी ज्यादा है। कमलनाथ सरकार के इशारे पर ये काम हो रहा है। सीएए का समर्थन कर रहे कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट संविधान और भारत माता का अपमान है। जिस संविधान का वह विरोध कर रही हैं, उसी संविधान की वजह से निधि निवेदिता कलेक्टर हैं, वरना कहीं रोटी बना रही होतीं।“ 

वर्तमान मंत्रियों के कार्यकर्ताओं से दुर्व्यवहार  के सम्बन्ध में वायरल वीडियो पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस सरकार के मंत्री सत्ता के नशे में चूर हो गए हैं। जीतू पटवारी और पीसी शर्मा मंत्री बनने लायक नहीं हैं। शिवराज के इस बयान पर मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि मुझे क्या रहना है, ये उन्हें तय नहीं करना है। मुझे कहां और क्या करना है, ये मुख्यमंत्री कमलनाथ तय करेंगे।शिवराज ने यह भी कहा कि कांग्रेस के मंत्रियों को गाड़ी, बंगले अधिकार मिले हैं तो क्या ये किसी को डांटने और अपमानित करने के लिए हैं। ये सब जनता और प्रदेश के विकास के लिए मिले हैं। लेकिन सारे सुख मिलने के बाद कांग्रेस के मंत्री सत्ता के नशे में इतने चूर हो गए हैं कि कुछ दिखाई नहीं देता। अब सवाल प्रदेश में विकसित हो रही इस नई राजनीतिक संस्कृति है | जिसमें नेतारूपी  भेरू जनता को बद्री बनाये हुए हैं।
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
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rakeshdubeyrsa@gmail.com
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