खंडवा में मप्र का फर्जी मंत्रालय: 200 से ज्यादा तबादले कई कैदियों की रिहाई के आदेश जारी हुए | MP NEWS
       
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खंडवा में मप्र का फर्जी मंत्रालय: 200 से ज्यादा तबादले कई कैदियों की रिहाई के आदेश जारी हुए | MP NEWS

खंडवा। कमलनाथ सरकार के खुफिया नेटवर्क और कांग्रेस के गली-गली में फैले नेताओं को कानो कान खबर नहीं लगी, मध्य प्रदेश के खंडवा में फर्जी मंत्रालय चल रहा था। इस नकली वल्लभ भवन से 200 से ज्यादा कर्मचारियों के तबादले आदेश जारी हुए, कई कैदियों की रिहाई के आदेश जारी हो गए। इसके अलावा सैकड़ों आदेश जारी हुए। सभी आदेशों पर प्रमुख सचिव और मंत्रियों की फर्जी सील वह हस्ताक्षर होते थे। अनिरुद्ध मोतेकर ने आनंद घर में अपना घर एवं ऑफिस बना रखा था। यहीं से वह अपनी सारी गतिविधियां संचालित करता था।

तीन मंत्रियों की नकली सील व लेटर पैड मिले 


आरोपी का नाम अनिरुद्ध मोतेकर (उम्र 30 वर्ष) बताया गया है। आरोपों के अनुरूप खुद को कभी एसपीसीबी आएगी, कभी मंत्रालय का सचिव और कभी महाराष्ट्र विधान परिषद का नेता प्रतिपक्ष बताता था। पुलिस का दावा है कि उसके घर से गृहमंत्री बाला बच्चन, स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट और वन मंत्री उमंग सिंगार सहित कई विभाग के प्रमुख सचिवों की नकली सील, लेटर पैड एवं दस्तावेज मिले हैं। पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में पता चला है कि अनिरुद्ध 200 से ज्यादा कर्मचारियों के आदेश जारी कर चुका है। अनिरुद्ध ने खंडवा, बुरहानपुर और मंदसौर के मामलों में सबसे ज्यादा फर्जी आदेश जारी किए। इसके अलावा मध्य प्रदेश के कई जिलों में अनिरुद्ध के फर्जी आदेश पहुंचे हैं। पुलिस ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है कि अनिरुद्ध ने खंडवा और बुरहानपुर की CJM कोर्ट कि नकली सील के माध्यम से कई सजायाफ्ता कैदियों की रिहाई के आदेश भी जारी किए हैं।

घर के अंदर पूरा सचिवालय था, सिक्योरिटी ऐसी की पुलिस भी चौंक गई


आरोपी अनिरुद्ध मोतेकर (30) को गुरुवार रात पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गुरुवार को एसपी डॉ. शिवदयाल सिंह को तूफान सिंह निवासी मंदसौर, रामेश्वर निवासी सुरगांव जोशी ने शिकायत की थी कि अनिरुद्ध मोतेकर ने उन्हें भूमि नामांतरण तथा वन क्षेत्र में वाहन परिवहन के नाम पर फर्जी आदेश जारी किए। पुलिस टीम अनिरुद्ध के घर पहुंची। आरोपी की लाइफ स्टाइल देख पुलिस अधिकारी भी सोच में पड़ गए। आरोपी के कैबिन तक जाने के लिए स्कैनर मशीन, आई स्कैनर, फिंगर प्रिंट की प्रक्रिया कराने के बाद ही मिलने की अनुमति मिलती थी। पुलिस ने उसके घर से दो बोरे दस्तावेज, आधा दर्जन वॉकी टॉकी, पिस्टल, दो लैपटॉप, स्कैनर मशीन, 20 फर्जी सील व सैकड़ों फर्जी नियुक्ति-पत्र जब्त किए हैं। 

पुलिस अधीक्षक डॉ शिवदयाल का बयान


फर्जी तबादला व पदस्थापना पर कहीं कोई नौकरी तो नहीं कर रहा, इसकी जांच शुरू की है। यह भी जांच हो रही है कि आरोपी ने फर्जी आदेश से बरगलाकर किसी ऑफिस में काम तो नहीं निकलवा लिया।'