भाजपा मध्यप्रदेश : भारी-भारी “प्रभारी” हो गये | EDITORIAL by Rakesh Dubey
       
        Loading...    
   

भाजपा मध्यप्रदेश : भारी-भारी “प्रभारी” हो गये | EDITORIAL by Rakesh Dubey

भोपाल। मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष कौन होगा, इसे लेकर घमासान शुरू हो गया है, एक साथ कदम ताल करने वाले, कुर्सी की दौड़ के कारण एक दूसरे को टंगड़ी मारने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं। मामला यहाँ तक पहुंच गया है कि अपने को भारी-भारी समझने वाले नेताओं के ‘प्रभारी’ बना दिया गया है। अब दौड़ में अरविन्द भदौरिया, दीपक विजयवर्गीय, वी डी शर्मा और अजयप्रताप सिंह बचे हैं। 15 दिसम्बर ताजपोशी की घोषणा का दिन है, नये फैसलों की नजर में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेशाध्यक्ष पद दौड़ में शामिल होने की बात पर प्रतिक्रिया स्वरूप कहा कि 'ये काल्पनिक प्रश्न है, मैं दूर-दूर तक दौड़ में नहीं हूं"। पर सूत्र कहते हैं कि चौहान ने इस विषय पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर अपनी बात रख दी है। 

उनका दाँव अंतिम समय पर पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह के लिए रहेगा। वैसे भी शिवराज सिंह सहित सारे भारी नेता प्रभारी [पर्यवेक्षक] हो चुके हैं। जैसे शिवराज सिंह- उत्तराखंड, नरेंद्र सिंह-उड़ीसा, थावरचंद गहलोत-बिहार,प्रभात झा-तेलंगाना, और कैलाश विजयवर्गीय-तमिलनाडू के प्रभारी [पर्यवेक्षक] हैं। मतलब साफ़ है, यहाँ नहीं वहां ध्यान दीजिये। अनुमान है कि इस बार प्रदेशाध्यक्ष के चुनाव से पहले रायशुमारी होगी और उसकी बागडोर संघ के विश्वस्त किसी वरिष्ठ नेता को दिए जाने का अनुमान हैं। वैसे भी इस पद को लेकर कहीं न कहीं कोई गंभीर मंथन संघ में भी चल रहा है। आम सहमति न बन पाने के कारण संघ की सहमति से कोई मनोनयन हो जाये जिसे सबको मानना होगा।

कहने को केंद्रीय नेतृत्व ने चुनाव के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और अश्विनी चौबे को नियुक्त किया है। इसी बीच पार्टी ने संघ से भाजपा में आये महासचिव राम माधव और विजय सोनकर शास्त्री को रायशुमारी के लिए भेजने का फैसला कर दिया। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि नए प्रदेशाध्यक्ष को लेकर पार्टी में आम सहमति नहीं बन पा रही है। वैसे राम माधव की मप्र की राजनीति में हमेशा अतिथि कलाकार की भूमिका रही है। कोई दखल नहीं रहने के बावजूद भी राम माधव की राय को महत्व दिया गया है । वैसे यह उनके लिए पहला अवसर है, जब वे महत्वपूर्ण विषय के समाधान के लिए आ रहे हैं।

70 प्रतिशत मंडल और 35 जिला अध्यक्षों के बाद अब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के निर्वाचन की तैयारियां शुरू हो गई हैं।यह संख्या पलड़ा झुकाने के लिए काफी है। आगरा पलड़ा नहीं झुका तो, प्रदेश अध्यक्ष के लिए रायशुमारी अगले हफ्ते हो। इसके लिए पेंचबंदी शुरू हो गई है। आधे से ज्यादा जिलों के अध्यक्षों के नाम घोषित कर केंद्रीय संगठन को इससे अवगत कराया जाए। इसी मुताबिक जिला अध्यक्षों के नाम फाइनल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिलों से आए बंद लिफाफों को खोलने का सिलसिला शुरू कर दिया गया। लिफाफे में क्या है? इसकी सुवास सिर्फ सुहास जानते हैं।

अगर प्रदेश अध्यक्ष का निर्वाचन रायशुमारी से होगा, तो इसमें प्रदेश स्तरीय नेताओं से ज्यादा बड़ी भूमिका राष्ट्रीय नेतृत्व की रहेगी। प्रदेश अध्यक्ष के पद पर वही नेता बैठेगा जो आलाकमान की पसंद होगा।

इससे पहले भी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद राकेश सिंह का नाम तय किया था, इसलिए प्रदेश के कोई नेता विरोध नहीं कर पाए थे। हालांकि उस समय भूपेंद्र सिंह, राजेंद्र शुक्ला, नरोत्तम मिश्रा जैसे नाम भी थे, लेकिन नाम राकेश सिंह का तय किया गया। वे महाकोशल से आते हैं। वहां से पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, विनोद गोटिया के नाम भी उछाले जा रहे हैं।ये सब नेता है। कार्यकर्त्तानुमा अध्यक्ष वर्तमान में भाजपा की आवश्यकता है, इसके लिए जो नाम सबसे चर्चित है वो दीपक विजयवर्गीय का है। अरविन्द भदौरिया इनमे एक अलग प्रकार है। कांग्रेस की बढती चुनौतियाँ, और प्रदेश राजनीति के मिलेजुले प्रहसन के लिए भाजपाके राष्ट्रीय नेतृत्व निर्लिप्त होकर , सोचना होगा और संघ को भी निष्पक्ष राय देना होगी।
देश और मध्यप्रदेश की बड़ी खबरें MOBILE APP DOWNLOAD करने के लिए (यहां क्लिक करें) या फिर प्ले स्टोर में सर्च करें bhopalsamachar.com
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क 9425022703
rakeshdubeyrsa@gmail.com
पूर्व में प्रकाशित लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए
आप हमें ट्विटर और फ़ेसबुक पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।