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भोपाल शताब्दी: एक घटिया रेल कार, एक माह में 248 शिकायतें

भोपाल। नई दिल्ली-हबीबगंज-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस जिसे भोपाल शताब्दी भी कहा जाता है अब एक बेहद घटिया रेलकार हो गई है। फ्लेक्सी फेयर सिस्टम के तहत शताब्दी एक्सप्रेस में हर नई सीट की बुकिंग पर थोड़ा ज्यादा किराया अदा करना पड़ता है परंतु इसमें सुविधाएं लगातार घटती जा रही है और शिकायतें बढ़ती जा रही है। किसी जमाने में सबसे तेज और लग्जरी यात्रा के लिए पहचानी जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस अब यात्रियों की पहली पसंद तो कतई नहीं रहेगा।

शताब्दी एक्सप्रेस की हर माह 200 से ज्यादा शिकायतें

एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली रेल मंडल की इस ट्रेन में औसतन हर रोज यात्रियों द्वारा 7 से 8 शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। शताब्दी के यात्रियों को अक्सर खराब खाना परोसा जाता है और देश की प्रीमियम ट्रेन होने के बावजूद गंदगी नजर आती है। इसका एसी भी आप ट्रेन की तरह खटारा हो गया है, आए दिन बंद हो जाता है। ट्रेने में हर माह खानपान संबंधी 120 शिकायतें, साफ-सफाई की 60 और एसी का कूलिंग सिस्टम खराब होने की 35 शिकायतें से ज्यादा मिल रही हैं। 

ट्रेन के कर्मचारी यात्रियों से अभद्रता करते हैं

रेलवे के सिस्टम और ट्विटर पर होने वाली शिकायतों में जानवर कटने की हर महीने 25, इंजन में खराबी संबंधी 5 और कर्मचारियों की अभद्रता से संबंधित तीन शिकायतें हर महीने दर्ज हो रही हैं। ट्रेन की आधा दर्जन श्रेणियों में शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है, फिर भी रेल प्रबंधन का ध्यान इनके निराकरण की ओर बिलकुल भी नहीं है।

शताब्दी से तो भोपाल एक्सप्रेस लाख दर्जा बेहतर है

भोपाल एक्सप्रेस में शताब्दी के मुकाबले इक्का-दुक्का शिकायतें ही दर्ज करवाई जाती हैं, जबकि पंजाबमेल व झेलम एक्सप्रेस में हर महीने हर तरह की कुल शिकायतों की कुल संख्या 80 से ज्यादा रहती है। जहां तक सबसे ज्यादा शिकायतों का मामला है, कुशीनगर एक्सप्रेस में यह संख्या 150 से ज्यादा हर महीने रहती है। यदि हर यात्री अपनी समस्या की शिकायत इस ट्रेन में करने लगे तो शिकायतों की संख्या हर महीने इससे दोगुनी हो सकती है। करीब 30 से 40% यात्री तो अपनी शिकायत ही दर्ज नहीं कराते हैं।

अनुराग पटेरिया, सीनियर डीसीएम भोपाल रेल मंडल का बयान

शताब्दी में सफर करने वाले यात्रियों द्वारा विभिन्न श्रेणी के तहत शिकायतें की जाती हैं, लेकिन रेलवे प्रबंधन लगातार इन शिकायतों पर ध्यान देता है। साथ ही संबंधित रेलवे जोन कार्रवाई भी करता है। सुधार की संभावना लगातार बनी रहती है।

सिद्धार्थ सिंह, प्रवक्ता, आईआरसीटीसी का बयान

खाने-पीने संबंधी शिकायतों की संख्या अन्य के मुकाबले ज्यादा है, इसको देखते हुए कैटरिंग कॉन्ट्रैक्टर्स पर लगातार कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया जा रहा है। लगातार किसी कॉन्ट्रैक्टर की शिकायत मिलने पर उसका कॉन्ट्रैक्ट निरस्त व सस्पेंड करने की कार्रवाई की जाएगी।