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सेना में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का मुखिया था फर्जी लेफ्टिनेंट | INDORE NEWS

इंदौर। बायपास पर हुए सड़क हादसे में मृत जयप्रकाश झा (Jayprakash Jha) सेना में फर्जी नियुक्ति (Fake appointment in army) करने वाले गिरोह का सरगना निकला। बुधवार को सेना और पुलिस उसके सील बंगले में सर्चिंग करने पहुंची। वहां से लेफ्टिनेंट की वर्दी और बिना रैंक लिखी वर्दी, प्रिंटर, नियुक्ति पत्र, कॉल लेटर, ट्रेनिंग की जानकारी सहित वर्तमान व रिटायर कर्नल, मेजर स्तर के अफसरों के जाली साइन वाले दस्तावेज और कार बरामद हुई। 

देर शाम पुलिस ने टूटे लैपटॉप को रिपेयर करवाया और डी-कोड किया तो चार जीबी डेटा मिला। इसमें फर्जी अफसर व सैन्य कर्मचारियों की सूची, आईडी कार्ड और कुछ प्रोफॉर्मा मिला। अफसरों के मुताबिक सूची उन लोगों की है जिन्हें वह फर्जी नियुक्ति दे रहा था। इसके बाद आर्मी इंटेलिजेंस, आईबी और एटीएस (Army Intelligence, IB and ATS) चौकन्नाा हो गई है। आर्मी वॉर कॉलेज (Army War College) (महू) के सफाईकर्मी 24 वर्षीय जयप्रकाश झा की मंगलवार सुबह रालामंडल के पास बायपास पर सड़क हादसे में मौत हो गई थी। झा को लेफ्टिनेंट समझ जांच कर रही पुलिस उस वक्त हैरान गई जब सैन्य अफसरों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि वह लेफ्टिनेंट नहीं, बल्कि सफाईकर्मी था। 

अफसरों ने उसके पास मिले कार्ड को फर्जी बताया और संदेह जताया कि झा फर्जीवाड़े में लिप्त था। अफसरों ने कार में मिले सामान की छानबीन की तो दो स्टार लगी वर्दी मिली। उस पर लगे फीते पर बिहार लिखा हुआ था। बुधवार को कर्नल बिजेंद्रसिंह (Colonel Bijendra Singh) और पुलिस अफसर समर्थ पार्क स्थित उसके बंगले पहुंचे और छानबीन की। यहां से एक अलमारी में दो वर्दी मिली। एक वर्दी जयप्रकाश की थी, जबकि दूसरी पर गौरव की नेमप्लेट लगी थी। पुलिस को पलंग के नीचे एक प्रिंटर भी मिला। दराज में सेना के जाली दस्तावेज मिले। पुलिस को पोर्च में एक कार मिली जो यश गोपाल मिश्रा क्यूएम ब्रांच आर्मी वॉर कॉलेज के नाम से रजिस्टर्ड है।

कर्नल स्तर के एक अधिकारी ने मंगलवार रात जयप्रकाश के भाई चंद्रप्रकाश से आर्मी परिसर में चाय पिलाकर पूछताछ की तो डरते हुए उसने कहा कि भाई के चाल-चलन पर शक था। इतने कम समय में उसने दो गाड़ियां खरीद ली थीं। पिता नूनू झा शिक्षक पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने कुछ समय पूर्व जयप्रकाश से कहा था कि 'मुझे तुम्हारा काम समझ में नहीं आ रहा है। तू गौरव (हादसे में मृत सहायक) की संगत छोड़ दे। जयप्रकाश नाराज हो गया और कहा मैं तुम लोगों को छोड़ दूंगा लेकिन गौरव को नहीं छोड़ूंगा।

जांच में शामिल कर्नल के मुताबिक बंगले से मिली गौरव की वर्दी बिलकुल नई है। उसे एक बार भी नहीं पहना गया। अभी जो सूची मिली, वह भृत्य, सर्वेयर, सफाईकर्मी, क्लर्क स्तर के कर्मचारियों की है। यह भी पता चला है कि वह यूपी और बिहार से युवाओं को भी नौकरी के नाम पर ठग रहा था। एक रजिस्टर मिला है जिसमें उनसे लिए गए लाखों रुपए की एंट्री दर्ज है।