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GWALIOR NEWS: अब ग्वालियर के बंटवारे पर बहस शुरू

ग्वालियर। प्रदेश के बड़े शहरों की तरह ग्वालियर में भी नगर निगम के बंटवारे की मांग बढऩे लगी है। भोपाल जबलपुर के बाद ग्वालियर के भाजपा व कांग्रेस नेताओं में भी इस बात की मांग बढ़ गई है कि नगर निगम का बंटवारा करते हुए दो हिस्सो में कर देना चाहिए। इससे पूरे शहर की तीन विधानसभाओं की आबादी दो नगर निगम के अधीन आ जायेगी। ऐसा होने से विकास कार्य भी तेजी से होने लगेंगे और अधिकारी भी उचित ढंग से जनता के कार्यों पर ध्यान दे सकेंगे।

कांग्रेस की ओर से पार्षद दल के नेता एडवोकेट कृष्णराव दीक्षित का कहना है कि प्रदेश सरकार की यह पहल उचित रहेगी। वहीं भाजपा नेताओं ने भी बंटवारे का समर्थन किया है। इस तरह की पहल से शहर के विकास में तेजी आयेगी। अभी नगर निगम के 66 वार्ड होने की वजह से अधिकारी कर्मचारी कार्यों पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। वहीं क्षेत्रफल भी तीन से अधिक विधानसभाओं में बंटा होने से कार्य कराने में परेशानी होती है। दोनों ही पार्टी के नेताओं ने इस कदम का तो समर्थन किया है। मगर महापौर के अप्रत्यक्ष चुनाव पर दोनों पार्टियों में विरोध की स्थिति बन गई है।

महापौर के चुनाव को लेकर जहां भाजपा नेता सरकार के विरोध में हैं वहीं कांग्रेस के नेता इसे ठीक कदम बता रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस कदम से पार्षदों के बीच खींचातानी बढ़ जायेगी और खरीद फरोख्त का चलन भी बढ़ेगा। वहीं कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इससे नगरीय निकाय के नियमों का ठीक ढंग से पालन हो सकेगा। इस मुद्दे को लेकर जहां भाजपा पूरी तरह से सडक़ों पर उतर गई है और प्रदेश सरकार के इस नियम के विरोध में शहर के सभी 66 वार्डों में हस्ताक्षर अभियान चला रही है। भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता सुबह से ही अलग-अलग वार्डों में पहुंचकर हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं जिसमें जनता से इस नियम के विरोध में हस्ताक्षर कर ज्ञापन राज्यपाल को भेजेंगे।

भाजपा का यह अभियान एक सप्ताह और चलेगा और इसके बाद नवम्बर के प्रथम वीक में भाजपा के मण्डल अध्यक्ष व जिलाध्यक्ष के चुनाव होंगे। वहीं महापौर पद के अप्रत्यक्ष चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि यह पद्धति पूरी तरह से ठीक रहेगी और अभी महापौर सीधे जनता द्वारा चुना जाता है। ऐसे में वह जनता की समस्याओं पर अधिक ध्यान नहीं देगा। नये नियम में पहले महापौर को पार्षद बनना होगा उसके बाद सभी पार्षद मिलकर महापौर का चुनाव करेंगे। ऐसे में जनता के साथ-साथ महापौर पार्षदों की भी बात सुन सकेंगे।