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सामाजिक सुरक्षा पेंशन: 24 करोड़ प्रतिमाह का घोटाला, 4 लाख से ज्यादा अपात्र और मुर्दा

भोपाल। पत्रकार रंजना दुबे ने खुलासा किया है कि मध्य प्रदेश में वितरित की जा रही सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में बड़ा घोटाला हुआ है। प्राथमिक जांच में पता चला है कि 4 लाख से ज्यादा ऐसे हितग्राहियों को पेंशन दी जा रही है जो या तो अपात्र हैं, या फिर उनकी मृत्यु हो चुकी है। कुछ ऐसे भी हैं जिनके एड्रेस गलत हैं। पता नहीं वो राज्य में हैं भी या नहीं। 

रेंडम जांच में 10% से ज्यादा फर्जी हितग्राही मिले

कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के बाद राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि दोगुना कर दी थी. इसके तहत हितग्राहियों को 300 रुपए से बढ़ाकर 600 रुपए पेंशन दिया जाना मंजूर किया गया था लेकिन सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले 42.60 लाख लोगों में से जब 1.87 लाख लोगों का भौतिक सत्यापन किया गया, तो 11 हजार लोग अपात्र मिले। वहीं करीब 8 हजार ऐसे हितग्राहियों के नाम भी सामने आए, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा दो हजार लोगों का पता सही नहीं मिला। भौतिक सत्यापन में इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के सामने आने से सरकार के अधिकारियों के कान खड़े हो गए हैं।

गरीबी रेखा की बंदिशें हटा दी अब सिरदर्द शुरू

भाजपा सरकार में प्रदेश के 40 लाख लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जाती थी। सरकार इस योजना पर करीब 120 करोड़ रुपए खर्च करती थी। कमलनाथ सरकार ने योजना के तहत और भी लोगों को जोड़ने के लिए गरीबी रेखा की बंदिशें हटा दी। इसके साथ ही पेंशन राशि भी दोगुना कर दी गई, जिससे हितग्राहियों की संख्या काफी बढ़ गई। वर्तमान सरकार ने करीब 43 लाख हितग्राहियों को पेंशन राशि देने का फैसला किया, जिससे योजना का बजट 256 करोड़ से ज्यादा हो गया है। 

1200 रुपए में नाम जुड़ जाता है

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत नाम जुड़वाने के लिए सबसे सरल तरीका है, रिश्वत। कलेक्टर कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि यदि आप 1200 रुपए खर्च कर सकते हैं तो शहर के करोड़पति का नाम भी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में दर्ज कर दिया जाएगा। बस उसके कुछ दस्तावेज होना चाहिए। वेरिफिकेशन नहीं होता। व्यक्ति जिंदा हो या मृत, वो राज्य में रहता हो या वर्षों पहले ही पलायन कर चुका हो, कोई फर्क नहीं पड़ता।