हनी ट्रैप: पूर्व मंत्री की पत्नी की पार्टनरशिप थी, 2010 के बाद छत्तीसगढ़ में करोड़ों कमाए

Bhopal Samachar
भोपाल। मध्य प्रदेश के हाई प्रोफाइल हनी ट्रैप मामले में खुलासों का क्रम जारी है। SIT की पूछताछ में कुछ नए खुलासे भी हो रहा है। सबसे बड़ा खुलासा यह कि एक पूर्व मंत्री की पत्नी हनी ट्रैप गैंग के एनजीओ और कारोबार में विधिवत पार्टनर थीं। इस एनजीओ को भाजपा के कई सांसदों ने फंड किया है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ से करोड़ों की कमाई भी हुई है। 

हनी ट्रैप का शिकार आईपीएस SIT चीफ बनना चाहता चाहता था

हनी ट्रैप में फंसे एक आईपीएस अधिकारी SIT चीफ बनना चाहते थे। उन्होंने कई स्तर पर सरकार को एप्रोच भी किया लेकिन एक पूर्व मंत्री के करीबी होने की वजह से अधिकारी को एसआईटी चीफ नहीं बनाया गया।

आईएएस अफसर ने ट्रांसफर के लिए 1 करोड़ रुपए दिए थे

हनीट्रैप गैंग ने ट्रांसफर के लिए एक आईएएस अधिकारी से एक करोड़ रुपए लिए थे। पैसे देने के बाद भी अधिकारी को मनपसंद पोस्टिंग नहीं मिली। हनी ट्रैप के जाल में फंसे होने की वजह से आईएएस अधिकारी ने एक करोड़ रुपए वापस भी नहीं मांगे। दो साल पहले ही ये आईएएस अधिकारी पीएस के पद से रिटायर हुए हैं।

पूर्व मंत्री की पत्नी पार्टनर 

शिक्षा विभाग से जुड़े एक पूर्व मंत्री की पत्नी की पार्टनरशिप का खुलासा भी हुआ है। माननीय की पत्नी की पार्टनरशिप भोपाल की आरोपी महिला के पति के एनजीओ स्वप्निल एजुकेशन सोसाइटी और कारोबार में थी। माननीय की मेहरबानी थी कि इस एनजीओ को 6 साल से शिक्षा विभाग के साथ दूसरे सरकारी विभागों और सांसद निधि से भी फंड मिल रहा था। इस एनजीओ को दिल्ली, मुम्बई की बड़ी कंपनियों से कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड भी मिला था। एनजीओ को प्रदेश के साथ 2010 से छत्तीसगढ़ में भी बड़े स्तर पर काम भी मिला था।

छठवीं महिला की तलाश

एसआईटी को उस छठवीं महिला की तलाश है, जो भोपाल की आरोपी महिला की दोस्त थी। ये आरोपी महिला हनीट्रैप में फंसे नेताओं और अफसरों से लाइजनिंग कर दस फीसदी कमीशन लेकर पैसे वसूलती थी।

मोनिका के जैसे चार से ज्यादा लड़कियां जाल में फंसी हैं

इंदौर में दर्ज मानव तस्करी की जांच में सीआईडी को कई ऐसी जानकारी मिली हैं, जिससे यह पता चला है कि इस गैंग ने चार से ज्यादा दूसरी युवतियों को बहलाफुसलकर गैंग में शामिल किया था। अब उन युवतियों की तलाश कर सीआईडी नए केस दर्ज करेगी।
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