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महिला बाल विकास ने ECCE समन्वयकों के बिना ECCE नीति बना ली | Khula Khat

महिला बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 2013 में राष्ट्रीय ईसीसीई नीति 2013 का निर्माण किया था। महिला बाल विकास मध्यप्रदेश ने नीति के प्रावधानों अनुसार राज्य के आंगनवाड़ी केंद्रों पर शाला पूर्व शिक्षा एवं देखभाल की गतिविधियों को बेहतर ढंग से क्रियान्वित करने के लिए  2016  में परियोजना स्तर पर ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से 453 ईसीसीई समन्वयकों की नियुक्ति की थी।

विभाग द्वारा वर्तमान में राष्ट्रीय ECCE नीति के तहत राज्य की ECCE नीति तैयार की गई है जिसे ECCE समन्वयकों के पदों को सम्मिलित किये बिना ही कैबिनेट में लाया जा रहा है। ECCE समन्वयकों द्वारा 3 साल में अपनी मेहनत और काम से विभाग के आंगनवाड़ियों को पोषण आहार वितरण केंद्र से बदलकर आंगनवाड़ी नर्सरी स्कूल में विकसित किया तथा विभाग की कार्यकर्ताओ और पर्यवेक्षको को शालापूर्व शिक्षा हेतु प्रशिक्षित किया। 

ECCE समन्वयकों द्वारा शालापूर्व शिक्षा के क्षेत्र में किये गए बेहतर कामों के कारण ही विभाग द्वारा ECCE नीति का ड्राफ्ट तैयार किया जिसमें उन समन्वयकों के पदों का ही उल्लेख करना विभाग भूल गया। विभाग की मंत्री और अधिकारी बार बार पदों को निरंतर रखने का आश्वासन दे रहे हैं लेकिन नीति में पदों का उल्लेख न होने से इनके आश्वासन सिर्फ आश्वासन ही प्रतीत हो रहे है।

सरकार ने अपने वचन पत्र में संविदा पदों को समाप्त न करने और नियमित करने का उल्लेख किया गया फिर भी महिला बाल विकास में एक तरफ नीति बनाकर परीक्षा से चयनित पदों को नही रखा जा रहा है तो दूसरी तरफ बिभाग आउटसोर्स के माध्यम से अयोग्य लोगों को भर्ती कर रहा है। 

सरकार द्वारा ECCE समन्वयकों की वेतन के लिए बजट भी जारी किया जा रहा है फिर भी नीति में पदों का उल्लेख क्यो नही किया गया है ये समझ नही आ रहा है। यदि बिना ecce समन्वयको के नीति बन गई तो उसका क्रियान्वयन बेहतर ढंग से नही हो पायेगा तथा फिर से आंगनवाड़ी केंद्र दलिया बितरण केंद्र ही बन जायेंगे।

अतः निवेदन है कि ecce समन्वयको के पदों को सम्मिलित किये बिना ecce पालिसी को कैबिनेट ने जाने से रोकने तथा ecce समन्वयको के पदों का उल्लेख नीति में करवाने हेतु बिभागीय मंत्री तथा अधिकारियों से बात करने की कृपा करें।