Loading...

सुप्रीम कोर्ट का स्टे लगा है, फिर भी कर्मचारियों का प्रमोशन कर दिया | MP EMPLOYEE NEWS

भोपाल। प्रमोशन में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। किसी भी प्रकार के प्रमोशन पर स्थ​गन लगा हुआ है। पूरे प्रदेश में हजारों कर्मचारी बिना प्रमोशन के रिटायर हो गए और मप्र बीज विकास निगम के प्रबंध संचालक विनय बर्मन ने अपने रिटायरमेंट से पहले कुछ कर्मचारियों के प्रमोशन कर डाले। इसका खुलासा तब हुआ जब हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई। 

रिटायरमेंट के 2 दिन पहले गुपुचप प्रमोशन कर दिए
एक नाराज कर्मचारी इस मामले को लेकर कोर्ट पहुंच गया है। बर्मन 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हुए हैं और उन्होंने 29 दिसंबर को इन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पदोन्नति दे दी। पदोन्नति इतनी गोपनीय रखी गई कि कृषि विभाग के वरिष्ठ अफसरों को भी इसकी भनक नहीं लगी। मामला तब खुला जब निगम के कर्मचारी रवि मालवीय तत्कालीन प्रबंध संचालक के इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंच गए। पदोन्नति को वर्तमान प्रबंध संचालक रमेश भंडारी और कृषि विभाग के आला अफसर सही नहीं मान रहे हैं, लेकिन मामला कोर्ट में होने के कारण बोलने को भी तैयार नहीं हैं।

इन कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया
बर्मन ने निगम के क्षेत्रीय कार्यालय सागर में पदस्थ सहायक प्रबंधक हीरालाल अहिरवार को प्रक्षेत्र प्रबंधक वर्ग-एक के पद पर पदोन्नत कर उन्हें क्षेत्रीय प्रबंधक सागर पदस्थ कर दिया, तो क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर के सहायक प्रबंधक शंभूसिंह बारिया को प्रक्षेत्र प्रबंधक वर्ग-एक में पदोन्नत कर इंदौर में ही पदस्थ कर दिया।

पदोन्नति में निर्धारित नियमों का पालन भी नहीं किया
निगम के अन्य कर्मचारियों का आरोप है कि इस फैसले में रोस्टर नियमों का पालन नहीं किया गया। रोस्टर के मुताबिक चार पद में से दो सीधी भर्ती के थे और दो अन्य पद पदोन्नति से भरे जाने थे। इनमें एक सामान्य और एक एससी का पद था, लेकिन रोस्टर के विपरीत दो पदों की जगह तीन पद भर दिए गए, जबकि ये सभी पद एससी और एसटी संवर्ग से भरे जाने थे। 

पदोन्न्ति को निगम के कर्मचारियों ने कोर्ट दी चुनौती
निगम के कर्मचारियों की नियम विरूद्ध पदोन्नति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। कर्मचारी रवि मालवीय ने जबलपुर और लाल सिंह ने ग्वालियर में हाई कोर्ट में याचिका लगाई है। फरवरी में लगाई गई याचिका पर इस माह सुनवाई होनी है।