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प्रिय कमलनाथ जी, अच्छे अफसरों को बार-बार क्यों बदल रहे हो | KHULA KHAT by Mahendra Dubey

श्रद्धेय मुख्यमंत्री जी, ये पत्र आपको जिस वक्त लिख रहा हूँ वो सुबह के 6 बजे का वक़्त है। देर रात सोने की आदत की वजह से समय मेरी नींद का सबसे अहम समय होता है लेकिन आज चाह कर भी नींद नही आई और वजह आप आपकी सरकार का निर्णय है जिसने मुझ जैसे व्यक्ति को इस बात के लिए विवश कर दिया कि आपके आग्रह करूँ आपका ध्यानाकर्षण कराऊं ताकि आप इस दिशा में सोचें समझे और इसके लिए बहुत पुराना तरीका खुले पत्र को माध्यम बनाया है। चाहता तो ये सब आपसे व्यक्तिगत पत्राचार अथवा आपसे भेंट कर कह सकता था लेकिन दिल ने कहा कि अब सब सार्वजनिक होना चाहिए क्योंकि मसला सार्वजनिक ही है।

करीब दो दशकों से आपसे आपकी कार्यशैली से परिचित हूँ। आप मेरे भी पसंदीदा राजनेताओं में एक हैं। आपके निर्णयों का हमेशा कायल रहा हूँ किंतु मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद कुछ ऐसे निर्णय हैं जिनको लेकर मुझ जैसे आपके शुभचिंतकों को अब चिंता होने लगी है और ऐसे में हमारा नौतिक दायित्व बनता है कि आपका ध्यानाकर्षण कराए। में जिस जिले का निवासी हूँ वो जिला दमोह है। जिले में एक पत्रकार के रूप में काम कर रहा हूँ लेकिन पेशे से अलग जिले के प्रायः हर सार्थक कार्य का हिस्सा हूँ। सामाजिक साहित्यिक सांस्कृतिक खेल संघठनो के साथ पीड़ित मानवता की सेवा के लिए कृतसंकलित हूँ और इससे ज्यादा खास एक जिम्मेदार नागरिक हूँ लिहाजा इस जिले की हर बात की चिंता करना मेरा नौतिक दायित्व है और उसका पालन कर रहा हूँ।

मुद्दे की बात पर आता हूँ तो इस खुले पत्र के पीछे का मुख्य मकसद जिले के मौजूदा कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह का तबादला है। ट्रांसफर पोस्टिंग अदला बदली सब आपके और आपकी सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला है। जनता ने आपको चुनकर भेजा और इस काम के लिए भी भेजा तो किसी को कोई परेशानी नही है लेकिन सच भी यही है कि जनता के लिए ही जनता ने आपको चुना है और जब जनमानस की भावनाओं के विपरीत काम होने लगेगा तो शायद जनाक्रोश भी बढ़ेगा। मौजूदा दमोह कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह एक युवा आईएएस हैं। कम उम्र के ऊर्जावान कलेक्टर ने कम समय मे ही अपने कामो की वजह से जिले में अपना अलग स्थान बना लिया है और लोगों को उम्मीद है कि शायद ये युवा अधिकारी जिले के विकास में अपना महत्वपूर्ण किरदार निभाएंगे। जरा कड़क मिजाज इस अफसर से कुछ अफसरों कर्मचारियों और कुछ तथाकथित नेताओं को दिक्कत हो सकती है वो इसलिए कि कलेक्टर अपने मातहतों से सरकारी काम ले रहे हैं और नेताओं के काले कामों को पूरा नही कर पका रहे पर सवाल बहुसंख्यक जनमानस का है जिसको अपने कलेक्टर से जिले का विकास चाहिए। 

आपकी सरकार ने बिना किसी वजह के कुछ महीनों पहले आये कलेक्टर को भोपाल का रास्ता दिखा दिया जो एक अलोकप्रिय निर्णय नही बल्कि दमोह जिले की जनता के साथ अन्याय है। में आपका ध्यान आकर्षित कराते हुए बताना चाहता हूं कि आपने अपनी केबिनेट की बैठक में जिस "राइट टू वाटर " अधिनियम को लागू करने का निर्णय लिया कहीं ना कहीं दमोह के कलेक्टर ने उस पर पहले अमल कर लिया था। आज दमोह शहर के साथ ही जिले भर के दर्जनों तालाबों में कलेक्टर की पहल पर श्रमदान का काम चल रहा है। सालों से जो तालाब कब्जे की चपेट में थे उनसे कब्जा हटाने के साथ उनके गहरीकरण को जनसहयोग से कराया जा रहा है। आजादी के बाद सरकारी मशीनरी या शासकीय तंत्र के जरिये ये पहला मौका है जब जिले के तालाबों को लेकर काम हो रहा है। 

कलेक्टर ने औचक निरीक्षण कर के स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की कोशिश की तो आज कुछ हद तक हालात बदले हैं।दो दिन पहले ही इस दिशा में कलेक्टर की पहल पर मोबाइल एम्बुलेन्स के साथ पूरे प्रदेश का अलहदा बाइक एम्बुलेन्स का प्रोजेक्ट भी आपकी सरकार और नीति आयोग ने पास किया। जिन दफ्तरों में सरकारी मुलाज़िम हफ्तों गायब रहते थे वहां वक़्त की पाबंदी के साथ निष्ठा से काम करने लगे है। हमारे यहां कहावत है कि पूत के पावँ पालने में नजर आते हैं और जो जनचर्चा है उसके मुताबिक इन कलेक्टर से लोगों को यही उम्मीद थी कि अधिकारी काम करेंगे और नक्शा बदलेगा ओर जनमानस की भावनाओं के साथ फिर कुठाराघात हुआ। ये सब पढ़कर आपको और पढ़ने वालों को लग रहा होगा कि कहीं मेरा कोई निजी स्वार्थ इस सब मे निहित तो नही ? तो यहां साफ कर दूं कि एक या दो प्रेस कांफ्रेंस और चार से छह सार्वजनिक कार्यक्रमों के अलावा मेरी व्यक्तिगत सौजन्य भेंट तक श्री नीरज कुमार सिह से नही हुई हाँ जनहितैषी मुद्दों पर जरूर चर्चा हुई जो कि मेरी ड्यूटी भी थी लेकिन जिम्मेदार नागरिक होने की वजह से निगरानी रखना मेरा कर्तव्य था जिसके जरिये जिले में मुझे पहचान मिली और उस कर्तव्य का पालन मेने किया। 

आपकी सरकार में ये पहला अवसर नही है जब ऐसा हो रहा है बल्कि दमोह जिले के साथ सरकार गठन के साथ हिये व्यवहार शुरू हो गया था। लम्बे समय बाद जिले में एक सख्त ईमानदार और 18 से 20 घण्टे काम करने वाले आईपीएस अफसर श्री विवेक अग्रवाल बतौर एसपी काम कर रहे थे। जिले के हर इलाके के लोग उनके कामों से खुश थे सिवाए अपराधियों और माफियाओं के अमन चेन कायम था लेकिन उन्हें बदल दिया गया। आपने अपने हिसाब से नए एसपी को पदस्थ किया लेकिन चुनाव आयोग को शिकवा शिकायत हुई और बदल दिए गए। 

श्री नीरज कुमार सिंह के पहले श्री डॉ जे विजय कुमार भी इसी तरह के युवा अधिकारी थे। भाषा की दिक्कतों के बाद भी श्री विजय कुमार ने जिले में बेहतर काम किया निर्विवाद शांतिपूर्ण निष्पक्ष विधानसभा चुनाव संपन्न कराया लेकिन उसका पारितोषक उन्हें तबादले का दंश झेल कर मिला। आखिर बेहतर काम और जनसेवा करने वाले अधिकारियों के साथ ऐसा सलूक क्यों? अभी तो एक चर्चा और है कि जिले के एसपी श्री विवेक सिह पर भी तबादले की तलवार लटक रही है और पता नही की किस शाम सोशल मीडिया पर लिस्ट आ जाये और एक और युवा अधिकारी को दमोह से रुखसत होना पड़े। 

ये अफसरों की चाटूकारिता नही है बल्कि बार बार कह रहा हूँ कि जिले का हित हम जैसे लोगों के लिए महत्व रखता है। सब जानते हैं कि ये अफसर तीन साल से ज्यादा जिले में नही रह पाते तबादला होना निश्चित है पर यकीन मानिए इस तरह से बेवजह अफसरों को तबादले में धकेलने से उनके मनोबल पर असर जरूर पड़ेगा। खास तौर पर जब वो अपनी युवा अवस्था मे हों और शुरुवाती दौर में ही हों और उन्हें ये सब झेलना पड़े तो उनका लम्बा कॅरियर उन्हें अतीत से सीखने और कुछ बेहतर ना करने के लिए ही प्रेरित करेगा। 

आखिरी बात यही की तबादलों और अफसरों के आने जाने से कोई ज्यादा फर्क नही पड़ता कुछ दिन लोग सिस्टम को कोसते हैं प्रभावित अधिकारि या व्यक्ति भी मन ही मन कोसता है और फिर काम पर लग जाता है लेकिन मेरा मानना है कि इससे नुकसान जनता का ही पहले वहाँ की जनता जहां अफसर अच्छा काम कर रहा होता है और वो काम रुक जाता है और दूसरा वहां की जनता का जहां वही अफसर जाता है और पिछले पारितोषक को ध्यान में रखकर कुछ अच्छा करने से बचने लगता है। पुरानी बातें तो अब पूरी नही हो सकती लेकिन मुख्यमंत्री जी फिलहाल आप एक प्रयोग कर सकते हैं। आप सक्षम हैं और जिले में जनता की राय ले सकते हैं। आपके पास कई एजेंसियां है जिनके जरिये आप जिले के कलेक्टर/एसपी के क्रियाकलापों को लेकर जनमत तैयार करा सकते हैं कि क्या जनता संतुष्ट है तब अफसरों को अपना कार्यकाल पूरा करने का पूरा हक है। ये प्रयोग आपको वाकई कारगर साबित होगा और पांच साल तक सरकार चलाने में भी मदद करेगा।

आप की कार्यशैली और साख के अनुरूप मुझे उम्मीद है कि मेरे आग्रह पर विचार करेंगे। यदि आवाम चाह रही हो तो अपने आदेश को जरूर बदलिए और ना चाह रही हो तो इसी तरह सार्वजनिक तौर पर खुला पत्र लिखकर आपको धन्यवाद दूंगा। 
सादर
महेंद्र दुबे
जिम्मेदार नागरिक दमोह
9425095553