दिग्विजय सिंह: एक साध्वी से हार चुके हैं, क्या दूसरी से जीत पाएंगे | BHOPAL NEWS

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दिग्विजय सिंह: एक साध्वी से हार चुके हैं, क्या दूसरी से जीत पाएंगे | BHOPAL NEWS


भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इस बार कांग्रेस का सबसे ताकतवर नेता दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। भोपाल की चुनौती स्वीकारने से पहले शायद उन्होंने अनुमान भी नहीं लगाया था कि उनका मुकाबला साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से होगा परंतु भाजपा ने एन मौके पर साध्वी प्रज्ञा सिंह को ​भाजपा ज्वाइन कराई और टिकट दे दिया। सवाल यह है कि जो दिगिवजय सिंह साध्वी उमा भारती के सामने टिक नहीं पाए क्या वो साध्वी प्रज्ञा सिंह से चुनाव जीत पाएंगे। 

दिग्विजय सिंह: सरला मिश्रा मामले में तो आज भी संदिग्ध हैं

राजनीति के पंडितों के इस मानसिक व्यायाम का कोई ठोस परिणाम नहीं होता परंतु सट्टा बाजार की तरह ये अनुमान और आंकलन होते बड़े मजेदार हैं। जहां तक बात दिग्विजय सिंह की है तो निश्चित रूप से वो मध्यप्रदेश की राजनीति के दंगल में सबसे मजबूत पहलवान हैं परंतु जब-जब उनका सामना महिलाओं से हुआ, उनकी रणनीतियां फेल होतीं रहीं। कांग्रेस संगठन में भी वो समकक्ष महिला नेताओं से पराजित नहीं कर पाए। सरला मिश्रा मामले में तो बड़ी मुश्किल से बचे थे। 

2003 में आत्मविश्वास से भरे हुए थे दिग्विजय सिंह

2003 चुनाव के गवाहों से पूछो तो वो बताते हैं कि दिग्विजय सिंह उन दिनों आत्मविश्वास से भरे हुए थे। उनके आत्मविश्वास का स्तर इतना अधिक था कि वो चुनावी चुनौतियों तक को देख नहीं पा रहे थे और यहां तक कह दिया था कि यदि वो यह चुनाव जीत नहीं पाए तो सन्यास ले लेंगे। हालांकि इससे पहले 1998 के चुनाव में भाजपा को भरोसा था कि वो हर हाल में जीतेगी परंतु हार गई। 2003 में भाजपा ने साध्वी उमा भारती को मैदान में उतारा और दिग्विजय सिंह की सारी रणनीति फेल हो गई। 

2019 में साध्वी प्रज्ञा सिंह चुनौती बन गईं

चुनावी रणनीति के समय प्रज्ञा सिंह का नाम चल जरूर रहा था परंतु कोई इस बात पर विश्वास करने को तैयार नहीं था कि मालेगांव बल ब्लास्ट की आरोपी जो कोर्ट से निर्दोष प्रमाणित नहीं हुई है, को भाजपा टिकट देगी लेकिन भाजपा ने ऐसा कर डाला। दिग्विजय सिंह के सामने साध्वी प्रज्ञा सिंह चुनौती बनकर खड़ी है। दिग्विजय सिंह काफी संभलकर चल रहे हैं परंतु फिर भी भोपाल में साध्वी की लहर नजर आ रही है। भोपाल सहित देश भर में चर्चा का केंद्र अब दिग्विजय सिंह नहीं बल्कि साध्वी प्रज्ञा सिंह है। देखना रोचक होगा कि क्या इस बार दिग्विजय सिंह, साध्वी के सामने अपना मान बचा पाएंगे।