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ASI भाव सिंह घूसखोरी का दोषी प्रमाणित, 4 साल की जेल | BHOPAL

भोपाल। लोकायुक्त पुलिस द्वारा 2015 में रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया भोपाल यातायात पुलिस का सहायक उप निरीक्षक भाव सिंह न्यायालय में रिश्वत लेने का दोषी प्रमाणित पाया गया है। कोर्ट ने उसे 4 साल की जेल और 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। विशेष न्यायाधीश लोकायुक्त संजीव पांडेय (Lokayukta Sanjeev Pandey) ने सजा सुनाई। 

24 फरवरी 2015 को नरेला शंकरी (Narela Shankari) निवासी बनवारीलाल कैथल (Banvarialal Kaithal) ने रत्नागिरी चौराहे पर पदस्थ ट्रैफिक के एएसआई भाव सिंह के खिलाफ रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की थी। बनवारी के डंपर आए दिन रेत लेकर रिहायशी इलाके में आते-जाते हैं। भारी वाहनों के लिए सुबह आठ बजे से रात दस बजे तक नो एंट्री घोषित है। लोकायुक्त डीएसपी जेआर रघुवंशी के मुताबिक इस समय में डंपर लाने के लिए एएसआई उनसे चार हजार रुपए की मांग कर रहा था। सौदा 1500 रुपए में तय हुआ। शिकायत मिलने के बाद बुधवार दोपहर को लोकायुक्त की टीम ने योजना बनाकर बनवारी को एएसआई से मिलने चौराहे पर भेजा। यहां बनी पुलिस चौकी में बनवारी ने जैसे ही एएसआई को तय हुई रकम थमाई, वहां मौजूद टीम ने उसे दबोच लिया।

डंपर मालिक बनवारी के मुताबिक नो एंट्री में भारी वाहनों को आने जाने की परमिशन देने के नाम पर ट्रैफिक पुलिस जबरन पैसे वसूलती है। एएसआई ने उनसे कहा था कि इस रकम में से अफसरों तक भी हिस्सा पहुंचाना पड़ता है। उस समय डी श्रीनिवास वर्मा, डीआईजी ने कहा था कि डंपर संचालक मुझे यह बताएं कि ट्रैफिक एएसआई ने किस-किस पुलिस अधिकारी को रिश्वत की रकम पहुंचाने की बात कही। उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपी एएसआई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है लेकिन इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।