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जनसुनवाई: तेज आवाज में घोटाला बताने वाले के खिलाफ FIR | MP NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में जनसुनवाई के दौरान तेज आवाज में गणवेश घोटाला मामले में कार्रवाई की मांग करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अभिनंदन जैन के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिवपुरी स्कूल यूनिफार्म घोटाला मामले में इससे पहले भी कार्रवाईयां हो चुकीं हैं। तत्कालीन DPC शिरोमणि दुबे की भी तत्कालीन कलेक्टर से झड़प हो गई थी। 

घटनाक्रम क्या है 

राजे कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में सामाजिक कार्यकर्ता अभिनंदन जैन अपने एक साथी को लेकर पालक संघ की ओर से पहुंचा। कलेक्टर अनुग्रहा पी. को लिखित शिकायत सौंपते हुए कहा कि स्कूलों छात्र-छात्राओं के लिए स्कूल ड्रेस गुणवत्तायुक्त नहीं दी है। बच्चों को ड्रेस छोटी आ रही है। इसे लेकर कलेक्टर ने कहा कि आपने किस लैब में जांच कराई है। इस बात को लेकर अभिनंदन जैन घोटाले की बात कहकर कार्रवाई की मांग करने लगे और यहां से बहस शुरू हुई। इसी दौरान कलेक्टर का सुरक्षा गार्ड आया और हाथ पकड़कर बाहर करने लगा। इस पर अभिनंदन जैन ने कहा कि 'मैं बंदूक या बम लेकर थोड़ी न आया हूं, जो इस तरह पकड़कर खींच रहे हो। उसके बाद एक और कर्मचारी आया, युवक को गेट के बाहर निकाल दिया गया। 

Collectorate के चपरासी ने FIR दर्ज करा दी

उसके बाद कलेक्ट्रेट के चपरासी रामेश्वर सैमिल पुत्र पातीराम सैमिल उम्र 40 साल ने इस मामले की शिकायत सिटी कोतवाली में की। जहां चपरासी ने बताया कि जनसुनवाई कार्यक्रम में आरोपी अभिनंदन जैन आए और स्वयं की कोई समस्या का कोई आवेदन न देते हुए पालक संघ के लेटरपैड पर गणवेश वितरण संबंधी आवेदन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को दिया। उसके उपरांत अकारण ही वह तेज आवाज में चिल्लाते हुए जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य में व्यवधान उत्पन्न कर शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाई। पुलिस ने चपरासी की शिकायत पर सामाजिक कार्यकर्ता अभिनंदन जैन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। 

क्या चपरासी ऐसी FIR के लिए प्राधिकृत अधिकारी है

अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं। लोग सामाजिक कार्यकर्ता अभिनंदन जैन को धक्के देकर निकालने तक की कार्रवाई को उचित मान रहे हैं परंतु घोटाला बताने वाले के खिलाफ एफआईआर को अनुचित बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि सामाजिक कार्यकर्ता अभिनंदन जैन की शिकायत पर कार्रवाई होनी चाहिए, वो शासन की मदद कर रहा है। इधर एक प्रश्न और उपस्थित होता है कि क्या एक कार्यालय का चपरासी इस तरह के प्रकरण में फरियादी हो सकता है। क्या वो सक्षम प्राधिकृत अधिकारी है कि इस तरह की एफआईआर दर्ज कराए। सामान्यत: ऐसे मामलों में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी अपने पदनाम व सील के साथ मामले दर्ज कराते हैं। क्योंकि यह शासकीय कार्य में बाधा का मामला है जो निजी नहीं होता।