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मास्टर का मोड़ा और फॉरेस्ट गार्ड अब डिप्टी कलेक्टर बन गया | INSPIRATIONAL STORIES IN HINDI

भोपाल। दुनिया में बहाने हजार हैं परंतु यदि दिल में जुनून है तो दुनिया की कोई ताकत आपको चमत्कारी परिणाम तक पहुंचने से रोक नहीं सकती। CGPSC के सेकंड टॉपर गौतमचंद पाटिल की कहानी कुछ ऐसी ही है। उसकी जिंदगी में भी बहाने हजार थे। एक सरकारी शिक्षक का बेटा, फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी लग गई तो हर कोई किस्मतवाला ही कहेगा परंतु गौतम को इससे सब्र कहां था। उसका 'जुनून' उसे रुकने नहीं दे रहा था। और यही 'जुनून' है जिसने आज उसे डिप्टी कलेक्टर बना दिया। 

इंजीनियरिंग की पढ़ाई की फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी मिली / For the job of engineering education got the job of Forest Guard

गौतमचंद पाटिल (Gautamchand Patil) सेकंड टॉपर रहे हैं। उन्होंने 900.50 स्कोर किया है। फॉरेस्ट गार्ड की नौकर करते हुए कड़ी मेहनत कर राज्य प्रशासनिक सेवा (पीएससी) की परीक्षा दी और तीसरे प्रयास में दूसरा स्थान हासिल किया है। पहली बार वे इंटरव्यू तक भी नहीं पहुंच पाए थे। कबीरधाम जिले के बोड़ला ब्लॉक के मोतिनपुर गांव निवासी 28 वर्षीय गौतमचंद टीचर रोसेलाल पाटिल के बेटे हैं। गौतम ने शंकराचार्य कॉलेज से इंजीनियरिंग की है। पढ़ाई पूरी करते ही उन्होंने फॉरेस्ट गार्ड की परीक्षा पास की और जॉब करना शुरू कर दिया। 

कवर्धा के जंगलों में PSC की तैयारियां कीं

उन्होंने पांच साल पहले पीएससी की तैयारी शुरू थी। कवर्धा में फॉरेस्ट गार्ड रहते हुए उन्होंने पीएससी की पढ़ाई जारी रखी। 2017 में 18 डिपार्टमेंट के अंतर्गत 299 पदों पर भर्तियां निकली थी। जिसके बाद जून, 2018 में रिटन एक्जाम हुआ था। जनवरी 2019 में इंटरव्यू के 5 घंटे बाद ही फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया गया। जिसमें गौतम सेकंड टॉपर रहे।

किस्मत अच्छी नहीं थी लेकिन दिल में जुनून था

गौतमचंद ने बताया कि ये उनका तीसरा अटैम्प्ट था। पहली बार वे इंटरव्यू तक भी नहीं पहुंचे थे। दूसरी बार इंटरव्यू में पहुंचे भी लेकिन रैंक 251 रहा। तीसरे अटैम्प्ट में गौतमचंद ने इंटरव्यू में 100 मार्क्स स्कोर किए। उन्होंने कहा, मेरा लक्ष्य केवल डिप्टी कलेक्टर बनना था। इसी कारण मैंने और कोई परीक्षा नहीं दी।