सलकनपुर ट्रस्ट: शिवराज सिंह के नजदीकी अध्यक्ष को हटाया | HOSHANGABAD MP NEWS

03 January 2019

होशंगाबाद। प्रदेश में कांग्रेस का शासन आते ही प्रसिद्ध देवीधाम सलकनपुर का देवी धाम सलकनपुर मंदिर ट्रस्ट बुधवार को भंग हो गया। पूर्व सीएम शिवराज सिंह के करीबी महेश उपाध्याय को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। अब ट्रस्ट को प्रशासन संचालित करेगा। शिवराज सिंह के करीबी गांव सुड़ानिया के महेश उपाध्यक्ष पिछले 14 साल से सलकनपुर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष थे। बुधवार को एसडीएम बुदनी शैलेंद्र हिनोनिया, तहसीलदार रेहटी महेंद्र प्रताप सिंह, तहसीलदार अभिषेक शर्मा ने सलकनपुर ट्रस्ट की आय और चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा लिया। गुरुवार को मंदिर प्रशासक तय हो सकता है। 

आखिरी बार दस जुलाई 2008 में बनी मंदिर समिति 
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के उपसचिव के नाम से जारी पत्र के मुताबिक आखिरी बार मंदिर समिति का गठन 10 जुलाई 2008 में हुआ था। उस समय मंदिर समिति के अध्यक्ष महेश उपाध्याय सुड़ानिया (बुदनी), महंत प्रभुदास सलकनपुर और सदस्य भगवान सिंह पटेल रेहटी, भगवान सिंह नागर बायां तथा हरगोविंद मालवीय सलकनपुर थे। अब राज्य शासन ने समिति भंग कर दी। 

24 दिसंबर को मंदिर समिति हुई निरस्त 
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा 24 दिसंबर को मंदिर समिति गठन का आदेश निरस्त किया गया था। इस आदेश पर बुधवार को अमल करते हुए समिति के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने एसडीएम को मंदिर का प्रभार सौंपा। चल-अचल संपत्ति में 47 लाख नकदी, 5 लाख रुपए विभिन्न बैंकों में, 19 किलो चांदी, 10 तोला सोना, 19 एकड़ कृषि भूमि ट्रस्ट के खाते मे हैं। 

14 साल में सलकनपुर मंदिर में बढ़ी सुविधाएं 
महेश उपाध्याय ने सलकनपुर मंदिर समिति के अध्यक्ष के रूप में सबसे ज्यादा तीन कार्यकाल पूरे किए। इस दौरान सलकनपुर में कई विकास हुए। रोप-वे, सीढ़ी निर्माण, मंदिर पुर्ननिर्माण, धर्मशाला, सड़क मार्ग, सहित कई योजनाओं के माध्यम से करोड़ों के विकास कार्य करवाए गए। 
शिवराज सिंह चौहान के सीएम बनने के बाद सलकनपुर देवीधाम को तेज गति से किया गया। सलकनपुर में विराजित मां विजयासन शिवराज की कुलदेवी भी हैं। देवीधाम में क्षेत्र के लोगों की भी विशेष आस्था है। सलकनपुर आज पूरे प्रदेश का सबसे दर्शनीय स्थल बन गया है। 

1956 में स्थापित हुआ था ट्रस्ट
मंदिर ट्रस्ट की स्थापना 1956 में हुई। सबसे पहले अध्यक्ष वंशीधर पाराशर थे। 1969 में स्वामी नरेंद्र दास को अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद ट्रस्ट प्रशासन के पास आ गया। 1982 में दरबार हेमराज, 1988 में मनोहर लाल माहेश्वरी, 1991 में मंगलसिंह ठाकुर, 1996 में पं. जगदीश नायक, 2002 में विष्णु प्रसाद ठाकुर, 2004 में ट्रस्ट प्रशासन के पास रहा। इसके बाद 11 अगस्त 2005 से 2 जनवरी 2019 तक महेश उपाध्याय ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे। 

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