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किसान जल-सत्याग्रह: जहर की बोतल लिए पानी में बैठ गए | RATLAM MP NEWS

मनावर/रतलाम। एक ओर कड़ाके की सर्दी जिलेभर में लोगों को कंपकंपा रही है तो दूसरी ओर सुनवाई नहीं होने पर ग्राम बालीपुर के किसानों ने अनोखा तरीका अपनाया। वे नहर फूटने के बाद ठंडे पानी में हाथों में जहर की बोतल लेकर बैठ गए और विरोध प्रदर्शन किया।

सुबह सात बजे के पहले तक वर्तमान में तापमान 10 डिग्री के आसपास रहता है। किसानों ने इसकी परवाह भी नहीं की और पानी में जा बैठे। इनमें से एक किसान की ठंडे पानी में बैठने से तबीयत बिगड़ गई। बाद में अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर नहर की मरम्मत करवाई और समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया। 

किसानों का कहना है मान परियोजना जीराबाद की एम-17 नहर को अन्य किसानों द्वारा रात में फोड़कर उनके खेतों में पानी मोड़ लिया। जिसके कारण नहर के अंतिम छोर पर स्थित खेतों के किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। पानी न मिलने के कारण किसानों की गेहूं , चने की फसल सूख रही है। बालीपुर के किसानों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को घटना की शिकायत की। लेकिन अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया।

जिसको लेकर अंतिम छोर के किसान फूटी हुई नहर के पानी में बैठकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुए। ठंड के मौसम में जब सुबह-सुबह तापमान 10 डिग्री से भी कम होता है। ऐसे मौसम में सुबह करीब 7 बजे गांव के किसान पानी में धरना देने बैठ गए। धरने में बालीपुर के गौरव पाटीदार, हरिओम पाटीदार, राजा पाटीदार, पन्नालाल अगल्चा, मनोज पाटीदार आदि किसान व ग्रामीण शामिल थे। जिसमें पन्नालाल का स्वास्थ्य बाद में बिगड़ गया। 

नहर के साइड में नहीं बना रोड नहर की विजिट के लिए नहर के साइड में रोड होना चाहिए। मगर रोड का निर्माण आज तक नहीं हुआ। जब एसडीओ से रोड न होने का कारण पूछा गया तो सब इंजीनियर गोलमोल जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ते नजर आए। 

किसानों की धमकी-निराकरण नहीं हुआ तो करेंगे आत्महत्या 
किसानों ने धमकी भी दी कि अगर अधिकारी मौके पर नहीं आए और उनकी समस्या नहीं सुनी तो वे जहर खाकर आत्महत्या कर लेंगे। सभी किसान अपने हाथ में जहर की छोटी बोतल लेकर पानी में बैठे थे। इस घटना की सूचना मीडिया द्वारा अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलते ही सुबह 10 बजे के आसपास मान परियोजना के एसडीओ आलोक चौबे एवं सब इंजीनियर मौके पर पहुंचे और किसानों की समस्या देखकर तुरंत नहर की मरम्मत करवाने के आदेश दिए। तब जाकर धरने पर बैठे किसानों का गुस्सा शांत हुआ और वह धरने पर से उठे।