एमपी में मीसाबंदी पेंशन घोटाला: जांच की मांग | MP NEWS

Updesh Awasthee
भोपाल। मध्यप्रदेश में मीसाबंदी पेंशन का लेकर बवाल शुरू हो गया है। भाजपा की शिवराज सिंह सरकार ने इसे शुरू किया था। इसके तहत भाजपा एवं आरएसएस के लोगों को 25000 रुपए प्रतिमाह की पेंशन दी जा रही है। व्यापमं घोटाले के व्हिसल ब्लोअर आनंद राय ने मीसाबंदी पेंशन योजना को घोटाला करार देते हुए इसकी जांच की मांग की है। 

डॉ. आनंद ने ट्वीट करके बताया कि संतोष कुमार शर्मा जो शिवराज सिंह चौहान के निज सहायक हैं। इनका जन्म 1961में हुआ था। जब देश मे Emmergency यानी आपातकाल लगा तब ये 14 वर्ष के रहे होंगे लेकिन ये मीसाबंदी पेंशन ले रहे हैं। डॉ. आनंद का कहना है कि पेंशन घोटाले की जाँच की जानी चाहिए। जिस तरह स्वतंत्रता सेनानियों के समान दर्जा मीसा बंदियों को दिया है उसे खत्म किया जाए। 

क्या है मीसाबंदी पेंशन, किसे मिल रही है
बता दें कि इससे पहले भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मीसाबंदी पेंशन बंद करने की मांग की थी। यह पेंशन योजना भाजपा की शिवराज सिंह सरकार ने शुरू की थी। तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह इसके नियमों में ढील देते गए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभान्वित किया जा सके। इस योजना के तहत उन सभी नेताओं को पेंशन दी जा रही है जो भारत में आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए थे। चाहे वो केवल 1 दिन के लिए गिरफ्तार हुए हों। स्वभाविक है, ऐसे सभी नेता भाजपा/आरएसएस के लोग हैं। मजेदार बात तो यह है कि जिन नेताओं ने जेल से रिहाई के लिए लिखित में माफी मांगी, इंदिरा गांधी में आस्थाएं जताईं, आपातकाल की तारीफ की और राजनीति त्याग दी उन्हे भी पेंशन दी जा रही है। 
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