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KAMAL NATH की लिस्ट में मिला एक और दागी IAS, कलेक्टर बनाया गया | MP NEWS

22 December 2018

भोपाल। व्यापमं घोटाले में दागी आईएएस शमीम उद्दीन के बाद अब एक और नाम सामने आया है। आईएएस श्रीनिवास शर्मा जिन्हे छिंदवाड़ा कलेक्टर बनाया गया है, वो तो भर्ती घोटाले के आरोपी हैं। उन्हे आरोप पत्र भी थमाया जा चुका है। आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने श्री शर्मा की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है। 

क्या है मामला
दमोह जिले के तत्कालीन कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा द्वारा जिले में की गईं चतुर्थ श्रेणी और कंप्यूटर आपरेटरों की नियुक्ति के मामले में सामान्य प्रशासन विभाग ने दस्तावेज मंगवाए थे। उनके कार्यकाल में कितनी जिले में नियुक्तियां की गईं हैं और उनमें किन नियमों का पालन किया गया है। इसकी जानकारी भी मांगी गई थी। कलेक्टर विजय कुमार जे ने सारी जानकारी भोपाल मुख्यालय भेज दी थी। जिसके बाद से तत्कालीन कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया। 

यहां पर बता दें कि तत्कालीन कलेक्टर डॉ. शर्मा के कार्यकाल में 2 दिसंबर 2016 को विज्ञापन जारी हुआ था। जिसमें जिले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की 39 नियुक्तियाें को लेकर रिक्त पद निकाले गए थे। इसी तरह तृतीय श्रेणी की नियुक्तियां भी गईं थीं। दोनों तरह की करीब 50 नियुक्तियों मामला सामने आया है। इसके अलावा जिला पंचायत में भी अलग से नियुक्तियां की गईं थीं। जिसमें संविदा कंप्यूटर आपरेटरों को स्थाई किया गया था। जबकि पूरे प्रदेश में इस तरह का नियम कोई भी लागू नहीं किया गया। मामला सामने आने के बाद से पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने मामला संज्ञान में लिया था। 

क्या है आरोप
दिव्यांग अभ्यार्थी धर्मेंद्र भारती ने बताया कि एमएलबी स्कूल में एक दृष्टि वाधित राजकुमार अहिरवार की नियुक्त की गई है। जिसकी नियुक्ति की गई है, उसकी आंखों में किसी तरह का दृष्टि दोष नहीं है। उसका प्रमाण पत्र फर्जी है, कलेक्टर के पास 25 से ज्यादा आवेदन दिए, लेकिन उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की, फिर हमने लोकायुक्त, सागर और भोपाल में शिकायत दर्ज कराई। श्री भारती का आरोप है कि लेन देन करके परीक्षा के पेपर घर पर कराए गए हैं। किसी को काफी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। आरटीआई में जानकारी भी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि पीजी कॉलेज में जिला पंचायत सदस्य रज्जन खंगार की नियुक्त प्यून के पद की गई। उनकी योग्यता देखी जाए और उनकी कॉपी की जांच कराई जाए तो हकीकत सामने आ जाएगी। 

नियमों का पालन नहीं किया: जिलास्तर पर परीक्षा करा ली
यह परीक्षा पूर्व कलेक्टोरेट अधीक्षक भरत गोस्वामी और क्लर्क कृष्ण मुरारी पांडे की देखरेख में कराई गई। नियम में अब इंटरव्यू और परीक्षा लेना बंद हो गया है, यह काम अब व्यापमं के हाथ में है, लेकिन यहां पर व्यापमं को गुुमराह करके जिला स्पर पर ही परीक्षा करा ली गई। उसने बताया कि इन शिकायतों की लोकायुक्त में जांचें चल रही हैं। इसमें कोषालय और विभागों के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। जिन कर्मचारियों को ज्वाइनिंग लेटर जारी किए गए हैं, उन्हें वेतन देने के लिए संबंधित प्रमुखों को भी आदेश दिए गए हैं। अब संबंधितों के लिए कोषालय से किस आदेश पर वेतन जारी किया गया और विभाग प्रमुखों से आदेश का पालन किस आदेश के तहत किया। यह जांच का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि लोकायुक्त ने भी इसमें वेतन भुगतान को लेकर आपत्ति उठाई थी, लेकिन इस मामले को बाद में दबा दिया गया। 

प्रश्न पत्र तैयार कराए, परीक्षा ली और ज्वाइनिंग दे दी 
चतुर्थ श्रेणी के 39 पदों पर भर्ती के लिए जिला स्तर पर परीक्षा का आयोजन कराया गया था, जिसमें प्रश्नावली तैयार कराकर उसकी जिला स्तर पर ही उत्तरपुस्तिकाओं की जांच कराई गई थी। जिसमें कई ऐसे अभ्यार्थियों का चयन किया गया था, जिनकी योग्यता कम थी, और उसकी मेरिट सूची में नाम दर्ज थे, उनका चयन भी कर लिया गया। जबकि ज्यादा पढ़े लिखे बेरोजगारों को रोजगार नहीं दिया गया। उनका नाम ही बाहर कर दिया गया। इसमें भी कई ऐसे अभ्याथियों का चयन किया गया था, जो दिव्यांग बताए गए और उनके फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर उन्हें दिव्यांग का लाभ दिया गया। इस प्रक्रिया पर अनेक सवाल उठे थे, मगर इसके बाद भी किसी की बात नहीं सुनी गई। 



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