सीबीआई की साख पर फिर सवाल | EDITORIAL by Rakesh Dubey

Updesh Awasthee
आखिर सीबीआई के भीतर चल रहा युद्ध सडक पर आ ही गया। अप्रत्याशित कदम उठाते हुए सीबीआई ने अपने उप प्रमुख विशेष निदेशक राकेश अस्थाना समेत चार लोगों के खिलाफ मांस कारोबारी मोईन खान को क्लीन चिट देने के मामले में रिश्वत लेने का मुकदमा दर्ज कर ही  लिया है। अस्थाना पर आरोप है कि उन्होंने रिश्वत लेकर मांस कारोबारी को क्लीन चिट दी। मोईन पर मनी लांड्रिंग (धन को अवैध रूप से देश से बाहर भेजने) और भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। इसी मामले में अस्थाना ने भी सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा पर रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुए दो महीने पहले कैबिनेट सेक्रेटरी को भी पत्र लिखा था। अब सवाल यह है कि यह बवाल क्यों हो रहा है ?  इससे जुड़ा एक और  सवाल है कि इस शिकायत से जुड़े कागजात बाहर कैसे आये और इसमें किसका हित शामिल है ?

सीबीआइ के प्रवक्ता अभिषेक दयाल के मुताबिक विशेष निदेशक अस्थाना, एजेंसी के अधिकारी देवेंद्र, रिश्वत देने में भूमिका निभाने वाले मनोज प्रसाद और उसके भाई सोमेश के खिलाफ १५  अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया है। मामले में खुफिया संगठन रॉ के विशेष निदेशक सामंत कुमार गोयल का नाम भी दर्ज किया गया है, लेकिन उन्हें अभियुक्त नहीं बनाया गया है। इस सिलसिले में देवेंद्र के दिल्ली स्थित आवास पर छापेमारी भी की गई। ये मुकदमे सतीश साना की शिकायत के आधार पर दर्ज किए गए हैं। साना मांस कारोबारी मोईन कुरैशी से संबंधित मामले में जांच का सामना कर रहा है।साना ही वह मध्यस्थ था जिसने मोईन को क्लीन चिट दिलाने में अहम भूमिका निभाई। सीबीआइ ने मामले के एक अन्य बिचौलिये मनोज प्रसाद को १६  अक्टूबर को तब गिरफ्तार किया जब वह दुबई से लौटा था। मनोज और उसके भाई सोमेश ने रिश्वत में दी गई धनराशि का इंतजाम करने में प्रमुख भूमिका निभाई। मजिस्ट्रेट के सामने मनोज के इकबालिया बयान के बाद अस्थाना के खिलाफ दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का मुकदमा दर्ज किया गया।गुजरात कैडर के १९८४  बैच के आइपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना प्रमुख मामलों की जांच करने वाले सीबीआइ के विशेष जांच दल (एसआइटी) के प्रमुख हैं। यह दल अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद में दलाली लेने, विजय माल्या कर्ज घोटाले जैसे प्रमुख मामलों की जांच कर रहा है।

इसमें कोई दो मत नहीं हो सकते कि सीबीआई में पदस्थ अधिकारियों के सम्पर्क राजनीति में नहीं है। इस मामले में जिस तरह की पेंचबंदी की गई है उसके तार राजनीति और 2019 में आने वाले आम चुनाव से जुड़े हैं। सीबीआई के दोनों धड़े एक दूसरे के खिलाफ पिछले कई महीनों से शिकायतें करवा रहे हैं। इसमें राजनीति की भी भूमिका साफ दिखाई देती है, जैसे शिकायतों का सार्वजनिक होना। शासकीय पत्रों को मीडिया को उपलब्ध कराना। ये कृत्य भी किसी अपराध से कम नहीं है। इस केन्द्रीय एजेंसी के साथ ही यह उन लोगों पर भी प्रश्न चिन्ह है जिन पर सीबीआई की निगहबानी की जवाबदारी है। जहाँ तक मोईन कुरैशी का सवाल है, उसके राजनीतिक सम्बन्ध जग जाहिर है। सवाल सीबीआई की गिरती साख का है।
देश और मध्यप्रदेश की बड़ी खबरें MOBILE APP DOWNLOAD करने के लिए (यहां क्लिक करेंया फिर प्ले स्टोर में सर्च करें bhopalsamachar.com
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
पूर्व में प्रकाशित लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए
आप हमें ट्विटर और फ़ेसबुक पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!