अमित शाह ने सवर्ण विरोधी घोषणा पत्र खारिज किया, नेता पुत्रों को टिकट नहीं

15 October 2018

भोपाल। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भोपाल में आहूत वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक में विक्रम वर्मा द्वारा बनाए गए भाजपा के घोषणा पत्र को खारिज कर दिया। उन्होंने पूछा मैनिफेस्टो मेंं सवर्णों के लिए क्या है? साथ ही वर्तमान जो घटनाक्रम चल रहे हैं, उसके लिए क्या प्रावधान किया है। इस पर वर्मा कोई जवाब नहीं दे पाए। इसके अलावा उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि नेता पुत्रों को टिकट नहीं दिया जाएगा। चाहे वो शिवराज सिंह के युवराज कार्तिकेय सिंह हों या केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे। 

भोपाल में आयाजित मीटिंग में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे। उन्होंने संगठन को विपक्ष पर एक साथ तीखा प्रहार और राहुल गांधी पर बयानबाजी तेज करने को कहा। देरी से चले चुनावी कामकाज पर शाह ने कहा कि दशहरे के बाद 10 दिन के भीतर सारी चीजें दुरुस्त कर ली जाएं। 

टिकट बंटवारे में परिवारवाद नहीं चलेगा
विस चुनाव में टिकट के सपने देख रहे नेताओं और उनके पुत्रों के सपनों पर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पानी फेर दिया है। होशंगाबाद में हुए भोपाल-नर्मदापुरम संभाग के बूथ लेवल कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने दो टूक कहा कि विस चुनाव में टिकट बंटवारे में परिवारवाद नहीं चलेगा। हिदायत देते हुए कहा- भाजपा काम करने वाले कार्यकर्ताओं की पार्टी है। इशारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वयं का उदाहरण दिया। मंच से कहा भाजपा चाय पिलाकर निस्वार्थ सेवा करने वाले नरेंद्र मोदी और पार्टी के लिए पर्दा, पोस्टर लगाने वाले मुझ जैसे छोटे जमीनी कार्यकर्ता की मेहनत समझती है। पार्टी किसी एक नेता की नहीं हर कार्यकर्ता उसका मालिक है। 

मंत्री सुरेंद्र पटवा को भाव तक नहीं दिया
कांग्रेस को कोसने वाली भाजपा में भी वंशवाद बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राज्यसभा सांसद प्रभात झा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने पुत्रों के राजनीतिक ‘राजतिलक’ करने की तैयारी में हैं। इनके अलावा कई स्थानीय नेता इसी जुगत में भोपाल के चक्कर लगा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे और वर्तमान पर्यटन मंत्री सुरेंद्र पटवा के साथ अध्यक्ष अमित शाह का मंच पर रवैया भाजपा के परिवारवाद को नकारे जाने का सबूत बनी। सुरेंद्र पटवा मंच पर व्यक्तिगत तौर पर अमित शाह से मिलना चाहते थे पर उन्होंने कोई भाव नहीं दिया।
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