रिवाल्वर से 'लक' आजमा रही थी लड़की, गोली चल गई, मौत | GWALIOR MP NEWS

11 September 2018

ग्वालियर। बॉलीवुड फिल्में भी लोगों की मौत का कारण बनतीं हैं। हिंदी फिल्म 'Luck' यहां 21 साल की करिश्मा यादव की मौत का कारण बन गई। वो फिल्म Luck की तरह रिवाल्व में 1 गोली डालकर अपना लक आजमा रही थी। शायद इससे पहले भी आजमा चुकी होगी। इस बार ट्रिगर दबा, गोली चली और करिश्मा की मौत हो गई। करिश्मा का चयन एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) हो चुका था, बस इंटरव्यू बाकी था। उसके पिता का सपना था कि बेटी सेना में जाए। 

घटना 7 सितंबर को करीब पौने 12 बजे गोला का मंदिर स्थित नारायण विहार कॉलोनी में हुई थी। घटना के वक्त करिश्मा के पिता रिटायर्ड सूबेदार अरविंद यादव पत्नी के साथ चित्रकूट गए थे। बड़ा बेटा शिवम फौज में है और वह छुट्टी पर घर आया हुआ था, लेकिन उस दिन इटावा गया था। जबकि छोटा बेटा देव जो दसवीं में पढ़ रहा है, स्कूल गया हुआ था। घर पर करिश्मा अकेली थी।

शुक्रवार के वह 30 मिनट, जब हुआ था हादसा
11.30 बजे: करिश्मा घर में अकेली थी। चित्रकूट से उसके फोन पर पिता का कॉल आया, उन्होंने हालचाल पूछा। बेटे देव के बारे में पूछा कि उसे लंच बनाकर दिया या नहीं। करिश्मा ने कहा कि लंच बना दिया लेकिन वह टिफिन घर पर ही भूल गया।
11.45 बजे: दिल्ली में रहने वाली सहेली नजमा का कॉल आया। इसके बाद दोनों वीडियो कॉलिंग से बात करने लगे। करिश्मा अपने पास रिवॉल्वर रखे बैठी थी। सहेली ने पूछा कि रिवॉल्वर क्यों रखी हुई है तो करिश्मा बोली लक-लक खेल रही थी।
11.50 बजे: कॉलिंग के दौरान रिवॉल्वर सिर पर लगाकर करिश्मा बोली-रिवॉल्वर में एक ही कारतूस है, देखते हैं आज लक काम करता है या नहीं। नजमा ने उसे रोका लेकिन तभी नेटवर्क गड़बड़ हुए और वीडियो कॉलिंग बंद हो गई। करिश्मा ने तभी ट्रिगर दबाया और गोली चल गई।

12 बजे: हादसे के बाद नजमा ने कॉल किया तो लड़खड़ाई आवाज में करिश्मा ने कहा कि गोली चल गई। इसके बाद फोन कट गया। नजमा के पास उसके परिजनों का नंबर नहीं था। उसने लगातार करिश्मा को कॉल किए। पुलिस को करीब 17 मिस्ड कॉल मोबाइल पर मिले।  
जैसा कि टीआई सुधेश तिवारी और करिश्मा के पिता अरविंद यादव ने बताया।

पिता चाहते थे बेटी सेना में जाए
करिश्मा पढ़ाई में अच्छी थी। वह अपने पिता की सबसे लाड़ली थी। पिता भी कुछ समय पहले ही फौज से रिटायर हुए हैं। बेटी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई की। उसे सीडीएस की तैयारी करनी थी। एनसीसी सी-सर्टिफिकेट कोर्स भी किया, उसके पिता का सपना था कि फौज में अफसर बने। सी-सर्टिफिकेट के आधार पर उसका चयन एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) के प्रथम चरण में हो गया था। करिश्मा का एसएसबी के लिए साक्षात्कार 1 दिसंबर को होना था। इसकी तैयारी के लिए वह ग्वालियर आ गई थी लेकिन वह पिता का सपना पूरा करने से पहले ही दुनिया से चली गई। 

जेएएच में पता चला- सिर में लगी है गोली
हादसे के बाद सबसे पहले करिश्मा के पास उसका बड़ा भाई फौज में कार्यरत शिवम पहुंचा। वह तय शेड्यूल से एक दिन पहले ग्वालियर आया था। दोपहर करीब 12.45 बजे जब काफी देर दरवाजा खटखटाने के बाद भी नहीं खुला तो पीछे की दीवार से घर की छत पर चढ़ा। उसने देखा कि अंदर बहन करिश्मा सिर पर तकिया लगाए लेटी थी। आंखें सूजी हुई थीं, वह बोल नहीं पा रही थी। सिर से खून बह रहा था। शिवम को लगा कि वह बाथरूम में गिर गई होगी, इससे उसके सिर में चोट आई है। करिश्मा को वह पहले बिड़ला हॉस्पिटल ले गया, जहां भर्ती करने से मना कर दिया लेकिन बताया नहीं कि उसके सिर में गोली लगी है। करिश्मा को जब जेएएच ले जाया गया तो सीटी स्कैन में गोली नजर आई लेकिन तब तक 5 घंटे गुजर चुके थे। काफी खून बह चुका था। इसके बाद उसे निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां ऑपरेट कर गोली निकाली गई। लेकिन सोमवार को उसने दम तोड़ दिया।
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